आइए जानें माता सीता जी से कौन सा घोर पाप हुआ,जानकर होंगे हैरान।

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दोस्तों हम जानते हैं की भगवान श्री राम विष्णु का ही एक अवतार थे। नारद जी ने उनके छलसे क्रोधित होकर एक बार भगवान विष्णु जी को श्राप दिया था, जिस कारण उन्हें भगवान श्री राम का रूप धारण करना पड़ा। यह बात तो सभी लोग जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि माता सीता को भी एक श्राप के कारण है पति वियोग का सामना करना पड़ा था।

माता सीता जी से हुआ था यह घोर पाप जानकर यकीन नहीं होगा, जानें यहा पर

अगर दोस्तों हम रामायण बात करे, तो भगवान श्रीराम ने एक धोबी को अपनी पत्नी के संध्या के कारण माता सीता को त्याग दिया था, लेकिन दोस्तों इसके पीछे वास्तविक घटना कुछ और ही है, तो आइए जानते हैं कि माता सीता को श्राप क्यों मिला था और वह श्राप किसने दिया था।

इस कथा के अनुसार माता सीता एक बार अपने महल के बगीचे के अंदर भ्रमण कर रही थी। भ्रमण करते समय उनकी नजर एक पेड़ पर बैठे तोते के जोड़े पर पड़ी वह जोड़ा माता सीता के बारे में वार्तालाप कर रहा था। वह माता सीता के भविष्य के बारे में वार्तालाप कर रहे थे, उनकी वार्तालाप सुनकर माता सीता को बड़ा ही आश्चर्य हुआ और कहा जाता है कि तोते का जोड़ा भगवान श्री राम के बारे में बातें कर रहे थे। इस कारण माता सीता की जिज्ञासा अपने भविष्य को लेकर और अधिक बढ़ गई और माता सीता ने अपने पहरेदारों को बोलकर उन तोते के जोड़े को बंदी बनवा लिया फिर तोते के जोड़े से अपने भविष्य के बारे में और अधिक जानकारी लेने लगी। माता सीता ने तोते के जोड़े से बड़े दिनों से अपने बारे में जानने की इच्छा जाहिर की और यह भी पूछा कि उनके पति के बारे में वह इतना कैसे जानते हैं, तब तोते के जोड़े ने बताया कि वाल्मीकि आश्रम के एक पेड़ पर रहते हैं और वह राम सीता की बातें करते रहते हैं। इसलिए उन्हें आपके और आपके पति के बारे में इतनी अधिक जानकारी है। इतना ही नहीं तोते की जोड़ी ने यह भी बताया कि भगवान श्री राम ही आपके स्वयंवर में भगवान शिव का धनुष तोडेंगे और आपका विवाह उनसे होगा।

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तब माता सीता ने उस तोते के जोड़े को अपने महल में रखने की जिद करने लगी तब नर तोते ने माता सीता से कहां की वह बंदी बनकर नहीं रह सकता वह पक्षी है और उसका घर खुला आसमान है तब माता सीता ने मादा तोते को अपनी कैद में रख लिया तब नर तोते ने कहा कि उसकी पत्नी इस समय गर्भावस्था में है और उसे इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत मेरी है, तो कृपया कर आप हमें जाने दे, लेकिन माता सीता नहीं मानी जिस पर नर तोते ने माता सीता को क्रोध वश में यह श्राप दिया कि आप भी अपनी गर्भावस्था के दौरान अपने पति से दूर रहेंगी। नर तोता कुछ समय पश्चात अपने प्राण त्याग देता है और कहां जाता है कि वहीं नरक तोता उस धोबी के रूप में जन्म लेता है और माता सीता के चरित्र पर सवाल उठाता है, जिस कारण माता सीता को श्री राम त्याग देते हैं।

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