ओवरब्रिज हादसा वाराणसी : बिहार से कार में जा रहे पिता-पुत्र की भी मौत

0
304

वाराणसी ओवरब्रिज हादसा: बिहार से कार में जा रहे पिता-पुत्र की भी मौत

 

पटना/ वाराणसी उत्‍तर प्रदेश के वाराणसी में रेलवे स्टेशन के समीप बन रहे फ्लाईओवर का एक स्‍पैन गिरने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में एक बस सहित कई गाडिय़ां दब गईं। इनमें शामिल सफेद रंग की एक हुंडई कार बिहार के सारण जिला निवासी राम बहादुर सिंह के नाम पर निबंधित है।
हादसे में राम बहादुर सिंह के बेटे जेम्‍स की मौत हो गई। उसका शव निकाला जा चुका है। जेम्‍स के साथ कार में रहे पिता राम बहादुर सिंह का फिलहाल पता नहीं चला है, लेकिन उनकी भी मौत की आशंका जताई जा रही है।
यह है घटना
विदित हो कि वाराणसी में कैंट स्टेशन के सामने सड़क पर उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम फ्लाईओवर का निर्माण करा रहा है। मंगलवार की शाम में इसका एक स्पैन अचानक गिर गया। इसकी चपेट में कई वाहन आ गए। दुर्घटना में दो दर्जन से अधिक लाेगों की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक घायल भी हो गए। स्थानीय लोगों ने स्‍पैन के नीचे दबे कई लोगों को बाहर निकाला। देर रात तक राहत व बचाव कार्य जारी है।
हादसे में मारे गए बिहार से कोटा जा रहे पिता-पुत्र
हादसे में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद समस्तीपुर स्थित स्टेट बैंक में कार्यरत तथा सारण जिला के निवासी राम बहादुर सिंह व उनके बेटे जेम्‍स की मौत हो गई। वे अपने बेटे का एडमिशन कराने कोटा जा रहे थे कि रास्‍ते में पुल का स्‍पैन उनकी कार के ऊपर आ गिरा। जेम्‍स का शव कार से निकाला जा चुका है। राम बहादुर सिंह के शव को अभी नहीं निकला जा सका है।

वाराणसी हादसा: छुट्टी पर आए जवान ने शुरू किया बचाव कार्य, लोगों से की अपील; जान जोखिम में डालकर मदद के लिए आए हजारों लोग

 वाराणसी. चौकाघाट-लहरतारा निर्माणाधीन फ्लाईओवर के दो स्लैप मंगलवार को वाइब्रेशन (कंपन) के चलते गिर गए। हादसा शाम 5.25 बजे के करीब हुआ। स्लैप गिरने से एक बस, आधा दर्जन बाइक, कार और ऑटो उसकी चपेट में आ गए जिस कारण 18 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद मिर्जापुर के रहने वाले आईटीबीपी के जवान रवींद्र सैनी ने बताया कि वह रोडवेज बस पकड़ने जा रहे थे। पीछे ऑटो में बैठे थे। सामने स्लैप को अपनी आंखों से गिरता देखा। धमाके के साथ शोर शुरू हो गया और लोग भागने लगे। जवान ने हादसे के बाद लोगों से राहत और बचाव के लिए अपील की जिसके बाद हजारों लोग मदद के लिए सामने आए।

– जवान ने बताया कि आधा दर्जन कारें पूरी तरह पिचक गईं। अंदर कई लोग फंसे थे जिन्हें बचाने के लिए कुछ लोग उसके साथ आए और रेस्क्यू शुरू हुआ। लोग ऐसे दबे थे कि इंच भर हिल भी नहीं पा रहे थे। बॉडी पार्ट कट गए थे। बस सांसे चल रही थी और मौत मांग रहे थे। एइ ऍन कॉलोनी के सामने कैंट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने जा रहे दर्जनों यात्रियों और स्थानीय लोगों ने गाड़ियों में फंसे लोगों को बचाने का काम शुरू कर दिया।

5.45 बजे पहुंची पुलिस, तब तक मदद में जुटे थे लोग
– मौके पर मौजूद कई लोगों ने बताया कि पुलिस के कुछ जवानों के पहुंचते ही लोग विरोध करने लगे। मौके पर करीब 10 हजार लोग मदद करने के लिए पहुंच गए थे। तमाम लोग मंजर देखकर बेहोश होते रहे और घर चले गए।
– स्थानीय लोगों ने ऑटो और बस के बीच फंसे चचेरे भाई नसरुद्दीन और शकील को बमुश्किल बाहर निकाला गया। 6.10 बजे मौके पर मौजूद लोग हर-हर महादेव का नारा लगाते हुए स्लैप को उठाने में मदद करने लगे। 7.40 बजे तक करीब आठ क्रेन मौके पर आ गई और एनडीआरएफ और लोगों की मदद से कार से बुजुर्ग महिला की लाश निकाली गई।

READ  ये 3 आदतो के लोग जीवन में कभी अमीर नहीं बन सकते, कहीं आप भी इनमें से तो नही

क्रेन स्लैप को उठा पाने में असफल रहा तो जान जोखिम में डालकर दर्जनों लोग पिछले हिस्से पर चढ़े
– मौके पर मौजूद महेश कुमार जायसवाल ने बताया कि पुलिस और लोगों ने रास्ते के पास की दीवार को तोड़कर क्रेन को बैक कराया। आठ क्रेन और करीब 100 से ऊपर लोग क्रेनों के पिछले हिस्से में चढ़ाये गए और स्लैप को उठाने का प्रयास किए गए। मदद करने वाले में हर-हर महादेव के नारे से एक किलोमीटर का इलाका गूंज उठा।
– 8.20 बजे 39 जीटीसी के 40 से ऊपर जवानों ने मोर्चा संभाला। क्रेनों के साथ जेसीबी लगवाकर स्लैप को हल्का ऊपर करवाकर एक कार को बाहर निकाला गया।
– इस दौरान खून से सने डेडबॉडी और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का क्रम जारी हुआ।
– 8.40 बजे बस को निकालने में एनडीआरएफ जुटी लेकिन पहली बार विफल रही। 9.15 बजे सेना, एमडीआरएफ और लोगों ने फिर से प्रयास शुरू किया और स्लैप को ऊपर उठा दिया और बस को दाएं-बाएं हिलाते आगे बढ़ा दिया गया।

अक्टूबर, 2015 से शुरू हुआ था पुल निर्माण का काम
-वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और सिगरा थाना क्षेत्र के लहरतारा इलाके में इस फ्लाईओवर के निर्माण के लिए 2 मार्च, 2015 को 12973.80 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई थी। अक्टूबर 2015 में पुल बनना शुरू हुआ।
– पुल का निर्माण पूरा करने की सीमा अक्टूबर 2018 तय थी, लेकिन अब तक 47 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है।
– पुल को बनाने का काम उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम द्वारा किया जा रहा है।

READ  गोल गप्पे खाने से खत्म हो जाते हैं। ... ये रोग जानिए