चैत्र शुक्ल नवरात्र : इस तरह करेंगे कलश स्थापना तो बरसेगी माता की कृपा

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चैत्र शुक्ल नवरात्र : इस तरह करेंगे कलश स्थापना तो बरसेगी माता की कृपा

गाजियाबाद। हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण पर्वों में शामिल देवी के नौ दिन यानि नवरात्र की शुरूआत रविवार से हो रही है। छठ नवमी तिथि की वजह से इस बार आठ ही नवरात्र होगें। इस बार एक ही दिन अष्टमी और नवमी मनाई जाएगी।ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक घट स्थापना के साथ में नवरात्र की शुरूआत होगी। इसलिए बेहतर फल के लिए शुभमहुर्त के हिसाब से ही स्थापना करें। तभी आपको व्रत रखने का पूरा फायदा मिलेगा।

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नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक चलने वाली दुर्गा पूजा में देवी मां के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इस बार प्रथम नवरात्र को सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है। इस वर्ष नवरात्रि नौ दिन की ना होकर आठ दिन की है। इसलिए जिनके यहां अष्टमी का हवन होता वो 24 मार्च को ही करें। जिनके यहां नवमी का हवन होता है वह 25 मार्च को हवन करें।

ये हैं कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पंडित शिवा गौड़ ने बताया कि नवरात्रि पर कलश-स्थापना (घटस्थापना) का शुभमहुर्त 18 मार्च को प्रात: 6 बजकर 31 मिनट से लेकर 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इसी महुर्त के बीच सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है जो कि अत्यंत शुभदायक होता है।

कलश स्थापना व पूजा विधि

हिन्दू शास्त्रों में किसी भी पूजन से पूर्व सर्वप्रथम श्रीगणेश की पूजा की जाती है। माता की पूजा में कलश से संबन्धित एक मान्यता के अनुसार, कलश को भगवान विष्णु का प्रतिरूप माना गया है। जिस कारण सर्वप्रथम कलश का पूजन किया जाता है। किन्तु कलश स्थापना से पूर्व पूरे पूजन स्थल को गंगा जल से शुद्ध कर लेना चाहिए। पूजन में सभी देवताओं आमंत्रित करना चाहिए। कलश में हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा, मुद्रा रखनी चाहिए। साथ ही साथ पांच प्रकार के पत्तों से कलश को सजाना चाहिए। इसके बाद कलश के नीचे बालू की वेदी बनाकर कर जौ बौने चाहिए। जौ बोने के साथ ही साथ माता अन्नपूर्णा का पूजन करना चाहिए। जिससे वह आपके घर में सदैव अन्न और धन का भण्डार भरे रखें।

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नौ दिन ऐसे करें पूजा

ज्योतिषाचार्य के अनुसार दुर्गा मां की मूर्ति पूजा स्थल के मध्य में स्थापित कर रोली, चावल, सिंदूर, माला, फूल, चुनरी, साड़ी, आभूषण और सुहाग से माता का श्रृंगार करना चाहिए। कलश स्थापना के दिन ही मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में से उनके मां शैलपुत्री स्वरूप की आराधना करनी चाहिए। इसके बाद रोजाना दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ और विधिपूर्वक पूजा करके अपना व्रत खोलना चाहिए।