यूपी बोर्डः बोर्ड के इस निर्देश के बाद 50 हजार विद्यार्थी हो सकते हैं बोर्ड परीक्षा से वंचित..?वजह जानकर हो जायेंगे हैरान

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इलाहाबाद. यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी से प्रारंभ होने जा रही हैं। वहीं परीक्षा प्रारंभ होने से ठीक पहले पंजीकृत 50 हजार संदिग्ध परीक्षार्थियों की रिपोर्ट मांग बोर्ड ने सबके होश उड़ा दिए हैं। बोर्ड के निर्देश जारी होते ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में अधिकारियों के होश उड़ गए हैं।

प्रशासन के आगे हर बार नकलवीहिन परीक्षा बड़ी चुनौती रही है। इसी चुनौती को ध्यान मंे रखते हुए प्रशासन के निर्देश पर यूपी बोर्ड लगातार सख्त दिख रहा है। यही वजह है कि बोर्ड ने पहले आधार कार्ड अनिवार्य किया फिर परीक्षा केद्रों का आॅनलाइन निर्धारण कर अपने इरादे साफ कर दिए। बोर्ड की इस सख्ती से नकल माफियाओं के होश उड़ गए हैं। वहीं अब बोर्ड ने कक्षा 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकृत 50 हजार संदिग्ध विद्यार्थियों की रिपोर्ट मांग अधिकारियों के होश होश उड़ा दिए हैं।

यह रिपोर्ट ऐसे परीक्षार्थियों की मांगी गई है जिन्होंने दूसरे बोर्ड के संदिग्ध दस्तावेज लगाए हैं। पिछली बार मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिलने को ध्यान मंे रख निर्देश जारी किया गया है। मालूम हो कि फर्जी दस्तावेज लगाकर करीब 30 हजार विद्यार्थियों ने अपना पंजीयन कराया था। हालंाकि मामले की शिकायत पर जब जांच हुई तो बोर्ड में बड़े पैमाने पर फर्जीवाडे का खुलासा हुआ। बोर्ड ने फर्जी दस्तावेज लगा कर परीक्षा पास करने वाले ऐसे विद्यार्थियों के अंक पत्र और प्रमाणप निरस्त कर दिए थे।

हालंाकि इस निरस्तीकरण को रद्द करने का लगातार बोर्ड पर दबाव बनाया गया। मुख्यमंत्री तक मामले की शिकायत की गई। वहीं मुख्यमंत्री ने ऐसे दागी स्कूलों के प्राचार्यों और प्रबंधकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश जारी किया। पिछली बार से सबक लेते हुए ही बोर्ड ने संदिग्ध परीक्षार्थियों की क्षेत्रीय कार्यालयों से रिपोर्ट मांगी है। बोर्ड की ओर से सोमवार को हुई देर शाम तक चली बैठक में बोर्ड परीक्षा के कई अन्य बिन्दूओं पर भी चर्चा हुई। इसमंे परीक्षा में उपस्थिति दर्ज करने, प्रयोगात्मक परीक्षा, माॅडल पेपर सहित अन्य बिन्दूओं पर भी चर्चा हुई।

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