17 मई से शुरू हो रहा है रमजान, क्या करें और क्या नहीं

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17 मई से शुरू हो रहा है रमजान, क्या करें और क्या नहीं

रिलिजन डेस्क। इस्लाम का पवित्र महीना गुरुवार, 17 मई से शुरू हो रहा है, जो कि शनिवार, 16 जून ईद तक चलेगा। रमजान में मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखते हैं। इन दिनों में मस्जिदों में नमाज और इबादत के साथ दुआ मांगने का दौर चलेगा। उज्जैन जिला हज कमेटी के अध्यक्ष नईम खान के अनुसार रमजान माह की शुरुआत चांद दिखने के साथ मानी जाती है। हर साल रमजान माह शुरू होने के दिन कभी घटते कभी बढ़ते रहते हैं। वर्ष 2014 से 2016 तक रमजान माह जून माह में आया था।

16 मई की रात चांद देखकर होगी रमजान की घोषणा

वर्ष 2017 में रमजान माह 28 मई से शुरू हुआ था। इस बार 11 दिन पहले यानी 17 मई से शुरू हो रहा है। अगर 16 मई की रात चांद दिखता है तो मस्जिदों में तरावी की नमाज अदा कर रमजान शुरू होने की घोषणा होगी। चांद नहीं दिखा तो पर्व एक दिन बाद माना जाएगा। 17 मई से रोजे शुरू हो जाएंगे। चांद के आधार पर पर्व की शुरुआत एक-दो दिन आगे-पीछे हो सकती है।

रमजान माह से जुड़ी खास बातें
– हिजरी कैलेंडर के नौंवें महीने को रमजान कहते हैं। इस महीने में मुस्लिम समाज के लोग रोजा रख कर खुदा की इबादत करते हैं। इस्लाम धर्म के लिए रमजान का पूरा महीना एक उत्सव की तरह होता है।
– इस्लाम की परंपराओं में रमजान माह का रोजा हर मुसलमान खासतौर पर युवाओं के लिए जरूरी फर्ज की तरह होता है।
– मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार मोहम्मद पैगंबर ने ही यह आदेश दिया था कि रमजान अल्लाह का माह है और रमजान में रोजा जरूर रखें, इबादत करें। इससे अल्लाह खुश होकर हर रोजेदार की इबादत कबूल करता है।
– इसलिए रमजान माह में रोजा गहरी आस्था के साथ रखे जाते हैं। इस्लाम धर्म का रोजा सिर्फ भूखे या प्यासे रहने की परंपरा मात्र नहीं है। बल्कि रोजे के दौरान कुछ मानसिक और व्यावहारिक नियम भी जरूरी बताए गए हैं।

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ये हैं रोजे से जुड़े कुछ खास नियम
1. रोजे के दौरान सिर्फ भूखे-प्यासे ही न रहें बल्कि आंख, कान और जीभ का भी गलत इस्तेमाल न करें यानी न बुरा देखें, न बुरा सुने और न ही बुरा कहें।
2. हर मुसलमान के लिए जरूरी है कि वह रोजे के दौरान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच के समय में खान-पान न करें।
3. रोजे की सबसे अहम परंपराओं में सेहरी बहुत लोकप्रिय है। सेहरी शब्द सहर से बना है, जिसका शाब्दिक मतलब सुबह होता है। नियम है कि सूर्य के उदय होने से पहले उठकर रोजेदार सेहरी करते हैं। इसमें वह खाने और पीने योग्य पदार्थ लेते हैं। सेहरी करने के बाद सूर्य अस्त होने तक खान-पान छोड़ दिया जाता है। इसके साथ-साथ मानसिक आचरण भी शुद्ध रखते हुए पांच बार की नमाज और कुरान पढ़ी जाती है। सूर्यास्त के समय इफ्तार की परंपरा है।
4. इस्लाम में बताए नियमों के अनुसार पांच बातें करने पर रोजा टूट जाता है- पहली झूठ बोलना, दूसरी बदनामी करना, तीसरी किसी के पीछे बुराई करना चौथी झूठी कसम खाना और पांचवीं लालच करना।