ब्लैक फंगस से रहना है दूर तो अपनाएं ये उपाय,घर पर बरते ये सावधानियां

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मेरठ। इन दिनों ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। मेडिकल और प्राइवेट अस्पतालों में ब्लैक फंगस से ग्रसित मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि जरा सी सावधानी और उपायों को अपनाकर ब्लैक फंगस से दूर रहा जा सकता है और इससे मुक्ति पाई जा सकती है। डा0 मुकेश परमार का कहना है कि ब्लैक फंगस कोरोना संक्रमण काल की बीमारी नहीं है। यह तो दशकों पुरानी बीमारी है। लेकिन इस समय कोरोना संक्रमण काल में यह कोरोना मरीजों को अपनी गिरफ्त में ले रही है। वहीं आम लोगों को यह बीमारी कुछ लापरवाहियों के कारण हो रही है। उन्होंने बताया कि अगर निम्नलिखित सावधानी बरती जाए तो ब्लैक फंगस ही नहीं अन्य किसी भी प्रकार के फंगस से निजात पाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि लोग मास्क को कई दिन तक धोते नहीं है उल्टा सैनिटाइजर से साफ करके काम चलाते है। ऐसा न करें। कपड़े के मास्क बाहर से आने पर तुरंत मास्क साबुन से धोएं, धूप में सुखाएं और प्रेस करें। सर्जिकल मास्क एक दिन से ज्यादा इस्तेमाल न करें। एन—95 मास्क को महंगा होने की वजह से लंबे समय तक उपयोग करना पड़े तो साबुन के पानी में प्रतिदिन कई बार डुबोकर धो लें, रगड़े नहीं। बेहतर हो कि नया इस्तेमाल करें। घर में अधिकांश सब्जियां खास कर प्याज़ छीलते समय दिखने वाली काली फंगस हाथों से होकर आंखों या मुंह मे चली जाती है। बचाव करें। साफ पानी, फिटकरी के पानी या सिरके से धोएं फिर इस्तेमाल करें। फ्रिज के दरवाजों और अंदर काली फंगस जमा हो जाती है खासकर रबर पर तो उसे तत्काल ब्रश साबुन से साफ करें। और बाद में साबुन से हाथ भी धो लें। जब तक बहुत आवश्यक न हो,ऑक्सीजन लेवल सामान्य है तो अन्य दवाओं के साथ स्टेरॉयड न लें। विशेष तौर पर यह शुगर वाले मरीजों के लिए अधिक खतरनाक है। यदि मरीज को ऑक्सीजन लगी है तो नया मास्क और वह भी रोज साफ करके इस्तेमाल करें। साथ ही ऑक्सीजन सिलिंडर या कंस्ट्रेटर में स्टेराइल वाटर डालें और रोज बदलें। बारिश के मौसम में मरीज को या घर पर ठीक होकर आ जाएं तब भी किसी भी नम जगह बिस्तर या नम कमरे में नहीं रहना है। अस्पताल की तरह रोज बिस्तर की चादर और तकिए के कवर बदलना है।और बाथरूम को नियमित साफ रखना है।
रूमाल, गमछा, तौलिया रोज धोएं
आप इन सब बातों का ध्यान रखें और दूसरों को भी बताएं तो इस घातक बीमारी से बचाव संभव है। क्योंकि इसका उपचार अभी बहुत दुर्लभ और महँगा है, इसलिए सावधानी ही उपचार है।

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