वीवो मोबाइल कंपनी पर फिर कसा जाएगा शिकंजा।

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मेरठ में वीवो कंपनी पर पुलिस ने शिकंजा कसने की तैयार कर ली है। एक आईएमईआई पर करीब 13 हजार मोबाइल चलने का मामला फिर से गरमा गया है। इस मामले में दोबारा से जांच के निर्देश दिए गए हैं। अबकी बार इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच ने वीवो कंपनी को नोटिस भेजने की बात कही है।
एडीजी मेरठ जोन कार्यालय में तैनात दरोगा आशाराम का मोबाइल जून 2020 को खराब हो गया था। दरोगा ने मोबाइल को वीवो कंपनी के सर्विस सेंटर पर दिया था। वहां पता चला कि मोबाइल में आईएमईआई नंबर ठीक नहीं है। एक आईएमईआई नंबर पर कई मोबाइल चल रहे हैं। यह सुनकर दरोगा हैरान रह गए और उन्होंने इस मामले में वीवो कंपनी और सर्विस सेंटर संचालक पर केस दर्ज कराया। पुलिस ने जांच की। इसमें पता चला था कि एक आईएमईआई पर करीब 13,500 मोबाइल चल रहे हैं।
तत्कालीन एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने भी कहा था कि किसी भी अपराधी को मोबाइल की आईएमईआई नंबर से उसकी लोकेशन और अन्य जानकारी मिलती है। सभी मोबाइल में आईएमईआई अलग-अलग होते हैं। बाद में साइबर सेल ने जांच की, लेकिन पुलिस वीवो कंपनी के खिलाफ सबूत नहीं जुटा पाई और मुकदमे में एफआर (अंतिम रिपोर्ट) लगा दी।
अब एडीजी मेरठ जोन द्वारा 25 जून को इस मुकदमे की दोबारा से जांच होने के निर्देश दिए गए। इस मामले में एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने मुकदमे की दोबारा से जांच कराने की बात कही। अब इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर को सौंपी गई। बताया गया कि इंस्पेक्टर ने वीवो कंपनी को दोबारा से नोटिस भेजा है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष होगी। जो सही होगा, उसमें ही कार्रवाई होगी।

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