दिल्ली रोड और गढ़ में डाक कांवड़ियों की भीड़, रोड डीजे और बम बम भोले की आवाज से गूंजा।

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मेरठ। कोरोना संक्रमण के चलते इस साल भी कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उत्तराखंड सरकार की सख्ती के चलते हरिद्वार और ऋषिकेश से कोई भी शिवभक्त कांवड़ नहीं ला सका। लेकिन ब्रजघाट और मुरादनगर की गंगनहर पर गुरूवार की रात से ही कांवड़ियों की भीड़ जुटने लगी। आज शिवरात्रि पर दिल्ली मेरठ हाइवे और मेरठ-गढ मार्ग पर डाक कांवड़ वालों की भारी भीड़ जुटी रही। डाक कांवड़ लाने वाले में सर्वाधिक मेरठ और दिल्ली के अलावा मुरादाबाद और हापुड,बुलंदशहर के श्रद्धालुगण रहे।
डाक कांवड़ियों का सर्वाधिक दबाव गढ रोड पर रहा। सुबह से ही मेरठ डाक कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ तो देर शाम तक यह डाक कांवड़ियों के औघडनाथ मंदिर में पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। डाक कांवड़ के चलते गढ रोड और दिल्ली रोड पर जाम भी लगा। पिछले 30 साल से लगातार कांवड लेकर आ र​हे हिंदू महासभा के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी गई थी। जिसके कारण वे ब्रजघाट से कांवड़ लेकर आए थे। इस बार उन्हें उम्मीद थी कि हरिद्धार से कांवड़ यात्रा शुरू करेंगे लेकिन इस बार भी पिछले साल की तरह यात्रा स्थगित हो गई। इस कारण वे
बृजघाट से कांवड़ लाए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 30 के रिकॉर्ड में उन्होंने इतनी तेजी से ना तो कोई कांवड़ बनाई है ना ही कभी इतनी जल्दी कोई कांवड़ आई। इस बार बाबा भोलेनाथ की ऐसी कृपा रही कि इतनी जल्दी सब कुछ हो गया कि कांवड़ बन भी गई और कांवड़ आ भी गई। अभिषेक की तरह ही और शिवभक्त थे जो हर बार पैदल कांवड़ लेकर आते थे, लेकिन वे भी इस बार डाक कांवड़ लेकर आए हैं।

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