SCO Summit 2022 : आखिर क्या है SCO Summit ? जहा PM Modi ने की भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की बात !

SCO Summit 2022 : उन्होंने कहा-'SCO के सदस्य देश, वैश्विक गिनती में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं और विश्व की 40 प्रतिशत जनता भी SCO देशों में निवास करती है, भारत SCO सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और आपसी विश्वास का समर्थन करता है।'
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SCO Summit 2022 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में एससीओ देशों के बीच आपसी सहयोग और अधिक बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा-‘SCO के सदस्य देश, वैश्विक गिनती में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं और विश्व की 40 प्रतिशत जनता भी SCO देशों में निवास करती है। भारत SCO सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और आपसी विश्वास का समर्थन करता है।’

उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) की समिट हो रही है. इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत दुनिया के बड़े नेता जुट रहे हैं. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी होगी.

दो साल बाद उज्बेकिस्तान के समरकंद में SCO की फिजिकल समिट हो रही है. कोरोना महामारी के कारण फिजिकल समिट हो नहीं सकी थी.

इस बार की SCO समिट इसलिए भी खास है, क्योंकि कोविड के दौर के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार अपने देश से बाहर किसी अंतरराष्ट्रीय समिट में हिस्सा लेने जा जा रहे हैं. दूसरी वजह ये है कि यूक्रेन युद्ध के बाद ये पहला मौका होगा जब पुतिन और जिनपिंग की मुलाकात होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस दौरान पुतिन के अलावा उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव और ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी से द्विपक्षीय बात करेंगे.

 

आखिर क्या है SCO ?

अप्रैल 1996 में एक बैठक हुई. इसमें चीन, रूस, कजाकस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल हुए. इस बैठक का मकसद था आपस में एक-दूसरे के नस्लीय और धार्मिक तनावों को दूर करने के लिए सहयोग करना. तब इसे ‘शंघाई फाइव’ कहा गया.

हालांकि, सही मायनों में इसका गठन 15 जून 2001 को हुआ. तब चीन, रूस, कजाकस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने ‘शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन’ की स्थापना की. इसके बाद नस्लीय और धार्मिक तनावों को दूर करने के अलावा कारोबार और निवेश बढ़ाना भी मकसद बन गया.

1996 में जब शंघाई फाइव का गठन हुआ, तब इसका मकसद था कि चीन और रूस की सीमाओं पर तनाव कैसे रोका जाए और कैसे उन सीमाओं को सुधारा जाए. ये इसलिए क्योंकि उस समय बने नए देशों में तनाव था. ये मकसद सिर्फ तीन साल में ही हासिल हो गया. इसलिए इसे सबसे प्रभावी संगठन माना जाता है.

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