हिजाब प्रकरण के बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद अध्यक्ष ने ​साड़ी को लेकर कही ये बात

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मेरठ। हिजाब को लेकर देश में बहस छिड़ी हुई है। वहीं मेरठ जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष और शहर काजी जैनुस्साजिददीन ने कहा कि शरीयत में हिजाब को महिलाओ के लिए पाक माना गया है। ठीक वैसे ही जैसे हिंदू महिलाएं आज भी गांव में साड़ी पहनती हैं और घूंघट करती हैं।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के मेरठ अध्यक्ष काजी जैनुस्साजिदृीन ने कहा कि कर्नाटक के हिजाब प्रकरण को लेकर जो हंगामा हो रहा है। वह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शरीयत में यह कहा गया है कि महिलाओं को अपना पूरा शरीर ढककर रखना चाहिए। सिर्फ आंखें खुली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सभी धर्मों के लोग निवास करते हैं। यहां पर सिख पगड़ी पहनते हैं दाढी रखते हैं। हिंदूओं में पंडित चोटी रखते हैं तिलक लगाते हैं। हमारे मजहब में महिलाएं हिजाब करती हैं। तो इससे गलत क्या है। इस देश की परंपरा और सभ्यता में पर्दा है। यह कोई धार्मिक मामला नहीं बल्कि कपड़े पहनने से जुड़ा है और कपड़े सभी पहनते हैं। उन्होंने कर्नाटक में हुए हिजाब प्रकरण को लेकर गैरजरूरी बताया। उन्होंने कहा कि हिजाब सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए जरूरी है। जिसके अंदर जितनी शर्म और हया है, उसके लिए पर्दा उतना ही जरूरी है। अगर शर्म-हया नहीं तो पर्दा भी जरूरी नहीं है।
शहर काजी ने कहा कि हर नागरिक पर्दा करता है। वह कपड़े पहनता है। यह हिजाब ही है। पर्दा सभी के लिए जरूरी है। कहा कि हमारे देश का माहौल ऐसा है कि यहां की परंपरा और सभ्यता में पर्दा है। यह कोई धार्मिक मामला नहीं, बल्कि कपड़े पहनना ही हिजाब है। न जाने इसको बिना वजह इतना तूल क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर साउदी अरब में चले जाए तो वहां पर महिलाओ के हाथ और पैर तक ढके होते हैं। वहां पर दुकान पर समान बेचने वाली महिलाएं भी हाथ में दस्ताने और पैरों में मोजें पहनती हैं। उन्होंने कहा कि आज भी भारतीय महिलाएं गांव और शहरों में साड़ी को पहनती हैं। साड़ी से अच्छा पहचावा कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि साड़ी से अच्छा हिजाब कोई दूसरा नहीं है। उन्होंने कहा कि साड़ी पहनकर हिंदू महिलाएं घूघट करती हैं और पर्दे में रहती हैं।

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