बिलासपुर 20 मार्च 2026/अटल विश्वविद्यालय में हिन्दू नववर्ष ‘स्वागतम् नव-संवत्सर २०८३’ क अवसर पर व्याख्यान माला आयोजित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने हिन्दू नववर्ष को नवचेतना, सकारात्मक ऊर्जा एवं जीवन में परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह केवल एक नया वर्ष नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, नवसृजन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं जीवन मूल्यों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. राजकुमार सचदेव, वरिष्ठ प्राध्यापक (हिन्दी), स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय, बिलासपुर उपस्थित रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि भारत की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं वैज्ञानिक संस्कृति है। हिन्दू नववर्ष ‘नव-संवत्सर’ केवल तिथि परिवर्तन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, खगोल विज्ञान एवं भारतीय जीवन दर्शन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। उन्होंने भारतीय काल गणना पद्धति को वैज्ञानिक एवं खगोलीय आधार पर आधारित बताते हुए ऋतु परिवर्तन, चंद्र एवं सूर्य की गति तथा प्राकृतिक चक्रों के महत्व को स्पष्ट किया। साथ ही उन्होंने वेद, उपनिषद एवं भगवद गीता में वर्णित जीवन मूल्यों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को इन्हें अपनाने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में गणेश राम साहू जी , सामाजिक कार्यकर्ता, बिलासपुर ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दी ।अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति एवं परंपराएं ही हमारी वास्तविक पहचान हैं। हिन्दू नववर्ष हमें नव ऊर्जा, सकारात्मकता एवं नई शुरुआत का संदेश देता है। उन्होंने सत्य, अहिंसा, प्रेम एवं “वसुधैव कुटुम्बकम्” जैसे मूल्यों को समाज में एकता एवं नैतिकता को सुदृढ़ करने वाला बताया तथा वर्तमान चुनौतियों के समाधान हेतु हमारी सांस्कृतिक विरासत को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम का संचालन एवं आयोजन सहायक प्राध्यापक डॉ. यशवंत कुमार पटेल, विभागाध्यक्ष, खाद्य प्रसंस्करण एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम द्वारा उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।कार्यक्रम के दौरान हिन्दू पंचांग, भारतीय परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष चर्चा की गई तथा विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक रहने एवं उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।


