
बिलासपुर23 फरवरी 20267अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में “समग्र विकास के लिए विश्वविद्यालयों का रूपांतरण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कुलपति सम्मेलन का रविवार को औपचारिक समापन हुआ।

हायर एजुकेशन के समग्र विकास के लिए रोड मैप जारी
42 कुलपतियों की उपस्थिति में उच्च शिक्षा के भविष्य पर गंभीर विमर्श के बाद ‘बिलासपुर घोषणा-पत्र” जारी किया गया। सम्मेलन में डिजिटल युग, उत्तरदायी एआई, मानवीय मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा के संतुलन पर विशेष जोर दिया गया। उच्च शिक्षा में समग्र बदलाव का रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
देशभर के 42 कुलपतियों का रहा जमावड़ा
अटल विश्वविद्यालय में 21 एवं 22 फरवरी को आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के कुलपति, शिक्षाविद, नीति-निर्माता और उच्च शिक्षा से जुड़े हितधारक एक मंच पर जुटे। अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने की, जबकि अंतिम दिन अतिथि के रूप में भारत विकास अध्ययन संस्थान के कुलपति प्रो. एनआर. भानू मूर्ति उपस्थित रहे। दो दिनों तक चली चर्चा का केंद्र यह रहा कि विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और नैतिक नेतृत्व के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आनलाइन संसाधन और डेटा विश्लेषण को सशक्त उपकरण बताया गया।
उच्च शिक्षा का बदलेगा उद्देश्य
घोषणा-पत्र में स्पष्ट किया गया कि उच्च शिक्षा का लक्ष्य केवल आर्थिक उत्पादकता नहीं होगा। विश्वविद्यालयों को मूल्य-आधारित सोच, नैतिक निर्णय क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता विकसित करनी होगी। शिक्षा को व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास से जोड़ा जाएगा।
एनईपी के तहत स्वायत्तता और नवाचार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विवि को शैक्षणिक स्वतंत्रता का पूरा उपयोग करने का आह्वान किया गया। बहुविषयक, लचीले और क्रेडिट-आधारित पाठ्य क्रमों के निर्माण पर बल दिया गया। कुलपतियों ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप पाठ्यक्रमों को अद्यतन करना अनिवार्य है। शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला बनाने पर सहमति बनी।
एआइ और ग्लोबल साउथ पर फोकस
सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक और समावेशी उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। कुलपतियों ने माना कि एआई को केवल तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि जिम्मेदार विकास के माध्यम के रूप में अपनाया जाना चाहिए। ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। तकनीक और मानवीय मूल्यों के संतुलन को भविष्य की शिक्षा की कुंजी बताया गया।
उच्च शिक्षा का बदलेगा उद्देश्य
घोषणा-पत्र में स्पष्ट किया गया कि उच्च शिक्षा का लक्ष्य केवल आर्थिक उत्पादकता नहीं होगा। विश्वविद्यालयों को मूल्य-आधारित सोच, नैतिक निर्णय क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता विकसित करनी होगी। शिक्षा को व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास से जोड़ा जाएगा।
शिक्षा से जुड़े हितधारक एक मंच पर जुटे। अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने की, जबकि अंतिम दिन अतिथि के रूप में भारत विकास अध्ययन संस्थान के कुलपति प्रो. एनआर. भानूमूर्ति उपस्थित रहे। दो दिनों तक चली चर्चा का केंद्र यह रहाकि विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और नैतिक नेतृत्व के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आनलाइन संसाधन और डेटा विश्लेषण को सशक्त उपकरण बताया गया।
एनईपी के तहत स्वायत्तता और नवाचार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विवि को शैक्षणिक स्वतंत्रता का पूरा उपयोग करने का आह्वान किया गया। बहुविषयक, लचीले और क्रेडिट-आधारित पाठ्य क्रमों के निर्माण पर बल दिया गया। कुलपतियों ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप पाठ्यक्रमों को अद्यतन करना अनिवार्य है। शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला बनाने पर सहमति बनी।






