छत्तीसगढ़बिलासपुर

क्षेत्र के मजदूर करने लगे पलायन

बिलासपुर 17 मार्च 2026/गर्मी शुरु होते ही अब मजदूरों का कमाने खाने के लिए पलायान शुरू हो गया है। इन मजदूरों की भीड़ नई दिल्ली की ओर जाने वाली हीराकुंड, जम्मूतवी, संपर्कक्रांति सहित अन्य ट्रेनों में है, जिसके कारण सामान्य यात्रियों को बैठने के लिए जगह मिलना भी मुश्किल हो गया है।

वर्षों से पलायन रुक नहीं रहा

प्रतिवर्ष गर्मी की शुरुआत होने के साथ ही खेती किसानी का काम बंद हो जाता है। वहीं बारिश के मौसम में निर्माण कार्यों के रुकने के हो बाद ग्रामीण दोबारा अपने काम में लग जाते हैं। गर्मी के मौसम में खाली होने की वजह से कमाने-खाने के लिए मजदूर हजारों की संख्या में बाहर निकाल जाते हैं। प्रदेश के बिलासपुर के साथ दुर्ग, राजनांदगांव, रायपुर, रायगढ़ के अलावा कोरवा से भी बड़ी संख्या जी में मजदूरों की संख्या ट्रेनों में अधिक हो जाती है. जो अपने परिवार व बच्चों के अलावा पूरा जा घर का साजो सामान लेकर ट्रेन से दिल्ली, कुल अमृतस्स, जम्मू और अन्य मेट्रो स्टेशन की से ओर रवाना होते हैं। इन मजदूरों की संख्या सबसे अधिक दुर्ग से रायपुर, भाटापारा, दाधापारा से डायवर्ट होकर उसलापुर होते हुए कटनी की ओर निकलने वाली दुर्ग-से जम्मूतवी विस्तारित उधमपुर, दुर्ग-हजरत रूप निजामुद्दीन संपर्कक्रांति, बिलासपुर से होकर जाने वाली पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस, गया विशाखापट्टनम अमृतसर हीराकुंड एक्सप्रेस में होती है। एसी कोच को छोड़कर और जनरल कोच में भीड़ अधिक होने के कारण के मजदूर और उनका परिवार स्लीपर कोच में सफर करता है, जिसे ईएफटी काटकर टीटीई सफर करने की अनुमति दे देते हैं। इसके कारण दो माह पहले बुकिंग कराने वाले यात्रियों को कोच में भी चलने की जगह नहीं मिल पा रही है।

सामान्य यात्री हो रहे परेशान

यही कारण है कि कोरबा यशवतपुर ट्रेन की कोच यात्रियों से भरी ठसाठस भरी रहती है और यात्रियों को खड़े होकर करना पड़ रहा सफर।रेलवे के कामर्शियल विभाग को अन्य विभागों के साथ राजस्व की कमाई का टारगेट दिया जाता है। रेलवे बोर्ड से जोन को और जोन से डिवीजन स्तर पर मिलने वाले कामर्शियल विभाग के टारगेट को पूरा करने के लिए अफसर सीटीआई और टीटीई की ड्यूटी स्टेशन और ट्रेनों में लगा देते हैं। टीटीई सबसे अधिक बिना टिकिट वाले यात्रियों के अलावा मजदूरों को बिलासपुर और उसलापुर से ट्रेन में रवाना करने के लिए प्रति यात्री १00 रुपए को रसीद काटते हैं, जिससे रेलवे को भी अच्छा खासा राजस्व प्राप्त हो जाता है।

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