बिलासपुर 28 फरवरी 2026/पर्यावरण विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण जिले में नई रेतघाटों में खुदाई के लिए फिलहाल अनुमति नहीं मिल सकी है। ऐसे में फिलहाल शहर के पुराने चार रेत घाटों में ही खुदाई की अनुमति है।शेष स्थानों घर पर्यावरण विभाग की एनओसी के बगैर खुदाई की अनुमति नहीं है।फिलहाल चार पुराने रेतघाटों से ही रेत खनन की अनुमति है। दिक्कत यह है कि जिन रेतघाटों में खुदाई प्रतिबंधित है, वहां रेत चोरों की सक्रियता हृद से ज्यादा देखी जा रही है। खुदाई के पीछे वास्तव में रेत चोर हैं, या कोई और ये जांच का विषय है।जिले में चार पुराने रेत घाटों में रेत खनन जारी है। इन रेतघाटों में उईबंद, अमलडीहा, करहीकछार एवं सोढ़ारखुर्द शामिल हैं, जबकि नए रेतघाटों के लिए पर्यावरण विभाग की एनओसी नहीं मिल पाने के कारण खुदाई फिलहाल प्रतिबंधित है। इस घाटों के अलावा अरपा नदी पर लोखंडी व सेंदरी सहित विभिन्न स्थानों पर रेत का अवैध खनन जारी है। नदी में पानी पूरी तरह सूख चुके होने के कारण चोंरों के लिए रेत खनन आसानी से किया जा सकता है।
यहां की रेत केवल पटाई के लायक
भवन निर्माण से जुड़े लोगों का कहना है कि भवन बनवा रहा कोई भी व्यक्ति अगर निर्माण में समझौता करना चाहे तो स्थानीय घाटों से निकलने वाली रेत का इस्तेमाल निर्माणाधीन मवन के प्लास्टर के लिए कर सकता है। इसके विपरीत गुणक्तायुक्त सामग्री का इस्तेमाल करने की चाहत रखने वाला व्यक्ति यहां की रेत का प्लास्टर में इस्तेमाल ही नहीं करता। जानकारों का कहना है अरपा की रेत 90 प्रतिशत तक केवल पटाई संबंधी कार्यों के लिए काम में लाई जाती है। भवन निर्माण के लिए लोग शिवरीनारायण की रेत को प्राथमिकता देते हैं, भले ही कीमत कुछ अधिक देनी पड़े।
00 की जा रही है कार्रवाई
जिले में अभी चार पुराने रेतघाट संचालित हैं, जहां खनन हो रहा है। इसके अलावा नए रेतघाटों में खनन की स्वीकृति पर्यावरण विभाग के एनओसी के अभाव में फिलहाल नहीं दी गई है। अवैध खनन के मामलों में लगभग रोज ही वाहनों की धरपकड़ की जा रही है।
– किशोर कुमार गोलघाटे, उपसंचालक खनिज विभाग

