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Home»छत्तीसगढ़»03मार्च पूर्ण चंद्र ग्रहण – चंद्र ग्रहण एक खगोलीय महाकाव्य
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

03मार्च पूर्ण चंद्र ग्रहण – चंद्र ग्रहण एक खगोलीय महाकाव्य

HD MAHANTBy HD MAHANT28/02/2026 - 4:34 AM
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 सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”

बिलासपुर 28 फरवरी 2026/  03 मार्च 2026 मंगलवार -बुधवार की दरमियानी रात्रि को विलक्षण खगोलिक घटनाक्रम के तहत पड़ने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को पृथ्वी के साये में चाँद के प्रवेश का वह मौन, वरदान-सा क्षण होगा जब आकाश अपने रंगों से खेलता है और चंद्रमा निकल-चमक कर “रक्तिम पूर्णिमा” का दृश्य प्रस्तुत करता है । जिसे खगोल विज्ञान में ब्लड मून कहा जाता है। ऐसा होने का कारण यह है कि जब चंद्रमा पृथ्वी की उम्ब्रा (गहरी छाया) में प्रवेश करता है, तो पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की किरणों को वक्रित करता है और केवल लाल-लाल प्रकाश चंद्रमा पर पहुँचता है ।जिससे उसका रंग लाल-सी दिखाई देता है।
तारीख: 3 मार्च 2026।
प्रकार: पूर्ण चंद्र ग्रहण ।
समय सीमा: लगभग दोपहर से संध्या तक ग्रहण जारी रहेगा। पूर्ण ग्रहण की अवधि: करीब 58 मिनट तक पूर्णता रहेगी।दुनिया में दृश्यता: पूरी रात की तरफ़ पृथ्वी पर जहाँ चाँद दिखाई दे, वहाँ इस ग्रहण को देखा जा सकेगा। भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कई अन्य क्षेत्रों में यह देखा जा सकेगा।
चंद्र ग्रहण सूर्य-पृथ्वी-चंद्रमा के सटीक संरेखण के कारण होता है। सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को दुनिया के अधिकतर हिस्सों से देखा जा सकता है जहाँ यह रात है , क्योंकि चाँद पूरे पृथ्वी के पूरे अँधेरे साइड पर चमकता हुआ दिखता है। भारत में भी यह ग्रहण पूरी तरह दिखाई देगा, और खास रूप से दक्षिण-पूर्वी समय में, जैसे कि चाँद क्षितिज पर ऊँचा उठ रहा होता है या पूर्ण रूप से दिखाई दे रहा होता है, इसका सुन्दर लाल रंग देखा जा सकता है।
ब्रह्माण्ड की इस अद्भुत घटना की वैज्ञानिक प्रक्रिया अत्यंत स्पष्ट है: जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, तो इसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पृथ्वी की छाया के दो भाग होते हैं:• पेनुम्ब्रा – हल्की छाया।• उम्ब्रा – गहरी छाया।पूर्ण ग्रहण तब होता है जब चाँद पूरी तरह से उम्ब्रा में डूब जाता है। यह गणितीय रूप से अपेक्षाकृत विनीत, परन्तु दृश्य रूप से अत्यंत प्रभावी क्षण है।
भारतीय पंचांग परंपरा में ग्रहण के समय को सूतक काल कहा जाता है । वह अवधि जो ग्रहण के पूर्व से प्रारंभ होकर ग्रहण के बाद थोड़ी देर तक मान्य होती है। इस दौरान कुछ कार्य (जैसे वस्त्र धोना, नहा-धोना, भोजन बनाना, शुभ कार्य आदि) विलंबित माने जाते रहे हैं। वैदिक ज्योतिष में सूर्य-चंद्र ग्रहण को आत्म-चिंतन, ध्यान-धारणा और मन की शान्ति का अनुकूल समय भी बताया गया है, लेकिन साथ ही साथ ग्रहण समय किसी भी नए या शुभ कर्म को आरम्भ करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है।
प्राचीन पुराणों में यह दृश्य राहु और केतु से जोड़ा गया है। कथा के अनुसार, देवताओं ने अमृत पिया तो असुरों में भ्रम फैलाया गया ।तभी अस्तित्व में आए राहु-केतु चंद्रमा को निगलने का प्रयास करते हैं। भगवान विष्णु ने अमृत पान करने वाले राहु को सिर से अलग कर दिया, पर उसकी सर्प-मुख छाया आज भी चंद्रमा को छिपाती है ।यही पौराणिक व्याख्या आज तक लोगों के मन में चंद्र ग्रहण को रहस्य और दिव्यता का रूप देती है। इस कथा में राहु और केतु (जो आधुनिक ज्योतिष में ग्रह रूप में माने जाते हैं) चंद्र ग्रहण को समय-समय पर दोहराते हैं और ग्रहण को कुछ उपायों, मंत्रों, और आध्यात्मिक अभ्यासों के साथ सजगता से मनाने की परंपरा समय-अनुसार चली आ रही है।

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क्या करें
✔ ध्यान/ध्यान-साधना
✔ मंत्रोच्चारण
✔ अपने मन को शांत रखना
✔ ग्रहण के बाद तर्पण/पितृ कर्म
*क्या न करें*
✘ ग्रहण के समय कोई नया काम प्रारम्भ न करें
✘ भोजन-पकवान न बनाएं
✘ नकारात्मक विचार न फैलाएं।

3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण जो पूर्ण, लाल-रक्तिम चाँद रूप में दिखाई देगा, वह खगोलीय, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है।यह न केवल पृथ्वी-सौर प्रणाली की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाता है बल्कि हमारे सांस्कृतिक आदर्शों, पुराणों और पौराणिक कथाओं की गहराई और अंतरिक्ष-जीवन के परस्पर सम्बन्ध को भी उभारता है।
आकाश की निस्तब्ध चादर पर जब पृथ्वी की छाया उतरती है,तब चंद्रमा केवल ढकता नहीं वरन् वह एक नई आभा में जन्म लेता है।रक्तिम प्रकाश में नहाया यह पूर्ण चंद्र ग्रहण मानो सृष्टि का मौन संवाद हो -जहाँ विज्ञान अपनी गणना करता है और अध्यात्म अपनी अनुभूति।यह दृश्य हमें याद दिलाता है !अंधकार स्थायी नहीं होता,छाया भी प्रकाश को नया रंग देने आती है।
इस चंद्र ग्रहण को देखते हुए, हमें यह भी स्मरण रखना आवश्यक है कि यह एक वैज्ञानिक घटना है जो निरपेक्ष नियमों के अधीन है, और यह मानवता के लिए आश्चर्य, विचार, आशा और आत्म-निरीक्षण का अवसर भी प्रदान करती है। इस अवसर पर सत्कर्म और पुण्य कार्यों में रत रहना, अति उत्तम माना गया है। इसके लिए एक बहुत अच्छा सरल और प्रभावी मंत्र है।जो इस प्रकार है। “ॐ सोमाय नमः”

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