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Home»छत्तीसगढ़»24 अप्रैल राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: ग्राम स्वराज, सहभागिता और लोकतंत्र की जड़ें
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

24 अप्रैल राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: ग्राम स्वराज, सहभागिता और लोकतंत्र की जड़ें

HD MAHANTBy HD MAHANT24/04/2026 - 4:11 AM
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सुरेश सिंह बैस शाश्वत

भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है—यह केवल एक कथन नहीं, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक ढाँचे की आधारशिला है। 24 अप्रैल को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हमें उस प्रणाली की याद दिलाता है, जो लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुँचाती है और आम नागरिक को शासन का सक्रिय भागीदार बनाती है।
पंचायती राज व्यवस्था का मूल उद्देश्य “ग्राम स्वराज” की अवधारणा को साकार करना है—एक ऐसा तंत्र, जिसमें गाँव स्वयं अपने विकास, संसाधनों और निर्णयों के लिए सक्षम और स्वायत्त हो। महात्मा गांधी ने जिस स्वराज की कल्पना की थी, उसकी वास्तविक अभिव्यक्ति पंचायतों के माध्यम से ही संभव है। यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देती है, बल्कि लोकतंत्र को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य भी करती है।
भारत में पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन (1992) के माध्यम से मिला, जिसने इसे एक सशक्त और व्यवस्थित ढाँचा प्रदान किया। इसके तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद—तीन स्तरों पर प्रशासनिक संरचना स्थापित की गई। यह प्रणाली स्थानीय आवश्यकताओं को समझते हुए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाती है।
पंचायतें केवल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भी आधारशिला हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था ने इन वर्गों को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर प्रदान किया है। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी ने ग्रामीण प्रशासन में एक नई संवेदनशीलता और दृष्टिकोण को जन्म दिया है।
हालाँकि, इस व्यवस्था के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। कई स्थानों पर संसाधनों की कमी, प्रशासनिक अनुभव का अभाव, और कभी-कभी राजनीतिक हस्तक्षेप पंचायतों की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी भी एक महत्वपूर्ण समस्या है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है।
आज तकनीक के युग में पंचायती राज प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन निगरानी तंत्र के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है और योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी और आम नागरिक का विश्वास भी मजबूत होगा।
पंचायती राज दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निरंतर सहभागिता और जिम्मेदारी की प्रक्रिया है। जब गाँव का हर व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होता है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।
निष्कर्षत: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस का संदेश यही है कि सशक्त गाँव ही सशक्त भारत की नींव हैं। यदि हम वास्तव में एक समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपने ग्रामीण तंत्र को मजबूत करना होगा और पंचायतों को वास्तविक अधिकार और संसाधन प्रदान करने होंगे।लोकतंत्र की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, उसका वृक्ष उतना ही सुदृढ़ और फलदायी होगा और पंचायती राज उसी जड़ को सींचने का कार्य करता है।

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 सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’

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