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Home»छत्तीसगढ़»25 अप्रैल –विश्व मलेरिया दिवस: रोकथाम, जागरूकता और स्वस्थ समाज की दिशा
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

25 अप्रैल –विश्व मलेरिया दिवस: रोकथाम, जागरूकता और स्वस्थ समाज की दिशा

HD MAHANTBy HD MAHANT25/04/2026 - 3:35 AM
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सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”25 अप्रैल 2026/ मानव इतिहास में कुछ बीमारियाँ ऐसी रही हैं, जिन्होंने लंबे समय तक समाज के स्वास्थ्य और विकास को प्रभावित किया है। मलेरिया ऐसी ही एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो आज भी विश्व के कई हिस्सों में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 25 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व मलेरिया दिवस हमें इस बीमारी के प्रति जागरूक होने, इसके रोकथाम के उपायों को अपनाने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में प्रयास करने की प्रेरणा देता है।मलेरिया एक परजीवी जनित रोग है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज़ मच्छर के काटने से फैलता है।
यह बीमारी केवल स्वास्थ्य की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी बाधा बनती है। विशेष रूप से गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी होती है, वहाँ इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है।भारत जैसे देश में, जहाँ जलवायु विविधता और जनसंख्या घनत्व अधिक है, मलेरिया का खतरा और भी बढ़ जाता है। बरसात के मौसम में जलभराव, गंदगी और अस्वच्छ वातावरण मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं। यह स्थिति इस बात की ओर संकेत करती है कि स्वच्छता और पर्यावरण प्रबंधन इस बीमारी की रोकथाम में कितने महत्वपूर्ण हैं।
मलेरिया के लक्षण—जैसे बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और कमजोरी—शुरुआत में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए और उचित उपचार शुरू किया जाए।
विश्व स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मलेरिया उन्मूलन के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। जागरूकता अभियान, कीटनाशक छिड़काव, मच्छरदानी का उपयोग और समय पर उपचार—ये सभी उपाय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत में भी राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के माध्यम से इस बीमारी को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस तथ्य पर यह भी याद रखना जरूरी है कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। घरों और आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा न होने देना, साफ-सफाई बनाए रखना, मच्छरदानी का उपयोग करना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना—ये सभी छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़े परिणाम दे सकते हैं।
यह दिवस हमें यह भी सिखाता है कि स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि एक व्यक्ति अस्वच्छता फैलाता है, तो उसका प्रभाव पूरे समुदाय पर पड़ता है। इसलिए हमें सामूहिक रूप से स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना होगा।
अंततः, विश्व मलेरिया दिवस हमें यह संदेश देता है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। यदि हम समय रहते सावधानी बरतें और जागरूकता फैलाएँ, तो इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और एक स्वस्थ समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।स्वस्थ समाज ही समृद्ध समाज की पहचान है—और मलेरिया मुक्त दुनिया उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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सुरेश सिंह बैस “शाश्वत
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