छत्तीसगढ़ की रेल परियोजना के विकास के दावे 2018-19 में केवल दिखावे तक सीमित रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकारें इस परियोजना को आगे बढ़ाने में विफल रही हैं। क्षेत्रवासियों की चार दशकों पुरानी मांग को देखते हुए रेल मंत्रालय ने झारसगुड़ा व्हाया कसडोल, बलौदा बाजार, खरोरा, से रायपुर तक 310 किमी लंबी रेल कॉरिडोर का सर्वे कराया, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद छत्तीसगढ़ रेल कार्पोरेशन ने खरसिया से दुर्ग तक नई रेल कॉरिडोर के लिए डीपीआर तैयार किया, लेकिन यह परियोजना अब भी ठप है।
2014 में स्वीकृत रायपुर-झारसुगुड़ा रेल लाइन की लागत 2163 करोड़ रुपए थी और इसकी डीपीआर 2016 में बनाई गई थी, जो मंत्रालय में धूल खा रही है। छत्तीसगढ़ रेल कार्पोरेशन ने 4900 करोड़ रुपए की लागत और चार साल में निर्माण की योजना बनाई, लेकिन परियोजना अगस्त 2018 के बाद से ठंडे बस्ते में है।
राजनीतिक दल केवल घोषणाओं से जनता को लुभाने में लगे हैं, जबकि ग्रामीण अब भी रेल लाइन के ख्वाब में जी रहे हैं, जो उन्हें व्यवसाय, आवागमन, और रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान कर सकती है।