छत्तीसगढ़बिलासपुर

ग्रामीणों द्वारा सीपत एनटीपीसी पर वादा खिलाफी और भ्रष्टाचार आरोप

बिलासपुर 25 फरवरी 2026/मंगलवार को मस्तूरी जनपद क्षेत्र के जनपद सदस्य और गतौरा सरपंच के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एनटीपीसी सीपत प्रबंधन द्वारा द्विपक्षीयण और त्रिपक्षीय बैठकों में बनी सहमतियों का पालन नहीं किया जा रहा है तथा क्षेत्र में व्यापक भ्रष्टाचार और अव्यवस्था व्याप्त है। ग्रामीणों ने बताया की पर्याप्त सुरक्षा सुविधाओं का पालन नहीं किया जा रहा है तथा क्षेत्र में व्यापक भ्रष्टाचार और अव्यवस्था व्याप्त है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम गतौरा के वार्ड क्रमांक 20 सुखरीपाली स्थित ठाकुर देव मंदिर के पास वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 692 पदों में से 152 पद आदिवासियों के लिए आरक्षित होने के बावजूद आज तक भर्ती नहीं की गई। साथ ही 66 लोको पायलटों को त्रिपक्षीय बैठक में स्वीकृत पदों में शामिल कर भू-विस्थापितों के साथ अन्याय किया गया है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी अटल बाजार से सुखरीपाली मार्ग को राखड़ परिवहन के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि गर्मियों में उड़ने वाली राख से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन केवल औपचारिकता निभाते हुए मोबाइल वैन घुमाकर खानापूर्ति की जाती है। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की व्यवस्था नहीं है।वाटर डैम निर्माण में लाल गिट्टी, कपची मुरुम जैसे गौण खनिजों के उपयोग में अनियमितता और रॉयल्टी पर्चियों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए शासन को करोड़ों रुपये के नुकसान की बात कही गई है। ठेका मजदूरों को निर्धारित 541 रुपये प्रतिदिन के स्थान पर 300 से 350 रुपये भुगतान किए जाने, दलदल प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा न मिलने और डाइक से हो रहे जल रिसाव से खेतों की उर्वराशक्ति नष्ट होने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राखड़ डैम में लगातार दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन उन्हें दबाने का प्रयास किया जाता है और पीड़ितों को नगण्य मुआवजा दिया जाता है।सेनोस्फीयर की कथित चोरी, फर्जी ट्रांसपोर्टरों पर कार्रवाई न होना, स्थानीय परिवहनकर्ताओं का भुगतान रोकना, 14 टन क्षमता वाले मार्ग पर 60-70 टन भार वाले वाहनों का संचालन तथा आरटीओ और प्रशासन की निष्क्रियता जैसे गंभीर आरोप भी ज्ञापन में शामिल हैं। आंदोलन की चेतावनी देने पर रासुका लगाने की धमकी दिए जाने को लोगों ने अलोकतांत्रिक बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बिजली पानी, सड़क, शिक्षा आर स्वास्थ्य जैसे बुनियादी विषयों पर सामाजिक दायित्व के तहत कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया गया। बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के वादे पूरे नहीं हुए और अकुशल कार्यों में भी प्रभावित ग्रामों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।दुर्घटनाओं में मृत श्रमिकों को उचित मुआवजा और ईएसआईसी नियमों का पालन नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है। ज्ञापन में एक अधिकारी की संलिप्तता का भी उल्लेख करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि 8 मार्च तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो 9 मार्च 2026 से एनटीपीसी में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ व्यापक आंदोलन शुरु किया जाएगा तथा राखड़ परिवहन बंद किया जाएगा। इस संबंध में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने एनटीपीसी अधिकारियों से चर्चा कर पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

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