छत्तीसगढ़बिलासपुर

प्रवासी भारतीय हिंदी भाषा व संस्कृति के ध्वज वाहक हैं- न्यायमूर्ति वाजपेई

बिलासपुर  27 फरवरी 2026/संस्कार भवन 25 फरवरी को विश्व हिंदी अधिष्ठान-रायगढ़,भाषा सहोदरी हिंदी समिति-दिल्ली,देवम् फाउंडेशन सोफिया-बुल्गारिया, प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी एवं राष्ट्रीय कवि संगम के संयुक्त तत्वावधान में विश्व हिंदी साहित्य सेवा सम्मान व पुस्तक विमोचन तथा काव्यगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति डाॅ चंद्रभूषण वाजपेई ने हिंदी भाषा की वैश्विक पहचान बनाने में प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए साहित्य के माध्यम से अपने इतिहास के महत्व पूर्ण पन्नों को देश के युवा नागरिकों के समक्ष रखना राष्ट्रीय कर्तव्य बताया तथा इस क्रम में डाॅ मौना कौशिक-प्रवासी भारतीय बुल्गारिया व बाग जलियांवाला पुस्तक के काव्य कृतिकार लिंगम चिरंजीव राव के योगदान की प्रशंसा की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डाॅ श्याम लाल निराला- प्राचार्य जे पी वर्मा महाविद्यालय ने इस आयोजन को बिलासपुर साहित्यधानी में निरंतर चलने वाले साहित्यिक अनुष्ठान का एक महत्वपूर्ण आयोजन निरुपित करते हुए आयोजक मंडल की प्रशंसा की।विशिष्ट अतिथि लाला जगदलपुरी सम्मान से सम्मानित डाॅ विनोद कुमार वर्मा ने नारी शक्ति की प्रेरक सत्य कथा पर आधारित अपनी कहानी कृति केवट की बेटी जैसी भारतीय बालाओं की पहचान विश्व पाठक समुदाय को कराने की पहल करने का सुझाव रखते हुए डाॅ मौना कौशिक के हिदी साहित्य के वैश्विक उन्नयन में दिए जा रहे योगदान की सराहना किए। अध्यक्षीय संबोधन में डाॅ मीन केतन प्रधान-अधिष्ठाता,विश्व हिंदी अधिष्ठान रायगढ़ ने प्रवासी हिंदी भाषा विदूषी डाॅ मौना कौशिक के सोफिया विश्वविद्यालय बुल्गारिया में बुल्गारियन साहित्य को हिंदी व हिंदी को बुल्गारियन भाषा में स्थापित करने में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया व विश्व हिंदी अधिष्ठान रायगढ़ के वैश्विक समन्वयन में योगदान को प्रस्तुत करते हुए प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी के संरक्षक डाॅ विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन के प्रति कृतज्ञता प्रकट किया।प्रवासी हिंदी भाषा विदुषी डाॅ मौना कौशिक ने बताया कि हिंदी साहित्य व बुल्गारियन साहित्य व कला के मध्य समन्वयन कार्य किए जा रहे हैं। बुल्गारियन छात्र हिंदी भाषा में स्नातक व परास्नातक कर रहे हैं।गोस्वामी तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा का बुल्गारियन व अंग्रेजी में अनुवाद कर वहाॅं के लोगों में लोकप्रिय बनाने तथा इसकी आध्यात्मिक शक्ति के प्रति लोगों में जागरूकता लाने का कार्य देवम् फाउंडेशन के माध्यम से किया जा रहा है।बाग जलियांवाला काव्य कृति कार लिंगम चिंरजीव राव ने अपनी कृति को जलियांवाला बाग में मारे गए निर्दोष स्वतंत्रता आंदोलन के सत्याग्रहियों के प्रति श्रद्धांजलि बताया।इस अवसर पर प्रवासी भारतीय डाॅ मौना कौशिक को उनके हिंदी भाषा को वैश्विक रुप में स्थापित करने के लिए छत्तीसगढ़ के साहित्य पुरोधा व छायावाद के जनक डाॅ मुकुट धर पाण्डेय की स्मृति सम्मान पत्र से सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन डाॅ राघवेन्द्र दुबे ने किया। स्वागत संबोधन अंजनी कुमार तिवारी’सुधाकर’ द्वारा व आभार प्रदर्शन डाॅ श्रीमती विद्या प्रधान द्वारा किया गया।कार्यक्रम के द्वितीय खंड में समसामयिक काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कवियों ने अपनी काव्य रसासिक्त रचनाओं से श्रोता वर्ग को मंत्र मुग्ध कर दिया। रचनापाठ करने वाले रचनाकार :अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर, डाॅ विवेक तिवारी,डाॅ शत्रुघ्न जेसवानी,राजेश कुमार सोनार, शीतल प्रसाद पाटनवार, राम निहोरा राजपूत, बालमुकुंद श्रीवास,श्रीमती कामना पाण्डेय,श्रीमती सुषमा पाठक,श्रीमती मीना दुबे,महेन्द्र दुबे,दीपक दुबे,पंकज शर्मा,डाॅ मौना कौशिक, डाॅ मीनकेतन प्रधान, श्री लिंगम चिरंजीव राव , डाॅ विनोद कुमार वर्मा,डाॅ राघवेन्द्र कुमार दुबे रहे।

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