छत्तीसगढ़बिलासपुर

गर्मी शुरू हुआ नहीं की जलस्तर में आई भारी गिरावट; 30 से 50 फीट नीचे पहुंचा जलस्तर

बिलासपुर 11 मार्च 2026/ नगर व आसपास के क्षेत्रों में बेधड़क ट्यूबवेल उत्खनन और गर्मी के धान की फसल की वजह से जिले में मार्च माह में ही जलस्तर 30 से 50 फीट नीचे जा पहुंचा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंप कनेक्शन सूख रहे हैं और नलकूप बंद होने के कगार में आ चुके हैं। ऐसे में पीएचई विभाग भरी गर्मी में वॉटर रिचार्ज की प्लानिंग में जुट गया है, लेकिन अधिकारियों को समझ नहीं आ रहा है कि गर्मी की शुरूआत में ही संकट छाया हुआ है, जिसके चलते मई-जून में हाहाकार मचना तय है।अभी गर्मी की शुरूआत ही हुई है, लेकिन जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। तखतपुर और बिल्हा ब्लॉक में अभी से ही पानी का संकट मंडराने लगा है। जिला प्रशासन की ओर से पीएचई और जलसंसाधन विभाग को इस पर काम करने के लिए लगाया गया है लेकिन गर्मी आते ही हायतौबा मचाने से समस्या का समाधान मिलना मुश्किल हो रहा है। विभागों की कार्यप्रणाली से यह साबित हो रहा है कि ‘प्यास लगने पर ही कुंआ खोदने’ की आदत अधिकारियों की नहीं जा रही है। दरअसल तखतपुर और बिल्हा ब्लॉक के गांवों में भू जल स्तर 30 से 50 फीट नीचे जा रहा है, कई जगहों पर नलकूप बंद हो चुके हैं। वहीं बोर से मटमैला पानी आने लगा है। विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी भी मिल रही है। ऐसे में अब वॉटर रिचार्ज करने की प्लानिंग में अधिकारी जुट गए है। इसके लिए प्रशासन की ओर से धान की फसल के रकबे में कमी लाने की बात कही गई है, इसके लिए कृषि अधिकारी क्षेत्र का दौरा कर रिपोर्ट देंगें लेकिन इस कवायद से भू जल स्तर में सुधार मुश्किल ही है।

गांवों में धड़ल्ले से ट्यूबवेल उत्खनन

खास बात यह है कि नदियों से पानी पहुंचाने की योजना ठप पड़ चुकी है, ऐसे में गांव-गांव में धड़ल्ले से ट्यूबवेल खनन किया जा रहा है। पीने के पानी के लिए जहां बलकूप की व्यवस्था ही एक मात्र साधन थी. वहीं अब हर घर में बोर कराया जा रहा है। शहरीय इलाको के अलावा गांव में भी खेतों में हर दिन बोर किया जा रहा है। जिससे भू जल स्तर तेजी से गिर रहा है। वहीं डबल फसल लेने और गमों के धान ने भी जलस्तर को नीचे पहुंचाने में मदद कर रही है।

प्रयास किया जा रहा है

अधिकारियों से इस बारे में चर्चा की गई है। तेजी से घट रहे जलस्तर में सुधार के लिए कदम भी उठाए जा रहे हैं। वाटर रिचार्ज कर सुधार किया जा सकता है।

अरूण भार्गव, एसडीओ, पीएचई, बिलासपुर

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