बिलासपुर। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए सिम्स अस्पताल में मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अस्पताल की दूसरी मंजिल पर कूलर टंकी में आग लगने का दृश्य तैयार कर बचाव व्यवस्था की जांच की गई। जैसे ही आग लगने की सूचना फैली, अस्पताल में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए फायर सेफ्टी उपकरणों की मदद से कुछ ही देर में आग पर नियंत्रण पा लिया। इस दौरान आपदा से निपटने की आंतरिक व्यवस्था संतोषजनक नजर आई, लेकिन शहर की ट्रैफिक व्यवस्था ने बड़ी कमी उजागर कर दी। निगम के पंप हाउस से पानी भरकर रवाना हुई फायर ब्रिगेड को रास्ते में कई स्थानों पर जाम और अव्यवस्थित यातायात का सामना करना पड़ा, जिससे अस्पताल तक पहुंचने में काफी देर हो गई !सदर बाजार से सिम्स मोड़ के पास एक स्कूटी सवार युवती फायर ब्रिगेड की चपेट में आकर गिर गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। इधर, सिम्स परिसर में फायर ब्रिगेड वाहन को पीछे करते समय अस्थि रोग विभाग के सामने खड़ी बाइक और स्कूटी से टक्कर हो गई। इस घटना के बाद वाहन मालिकों और दमकल कर्मियों के बीच बहस की स्थिति भी बन गई। मॉक ड्रिल के जरिए जहां अस्पताल और आपदा प्रबंधन टीम की तैयारियों का परीक्षण किया गया, वहीं शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की खामियां भी सामने आ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आपात स्थिति में त्वरित राहत के लिए यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करना बेहद जरूरी है। विशेष रूप से सिम्स जैसे संवेदनशील क्षेत्र, जहां अस्पताल के साथ बड़े बाजार और अन्य संस्थान स्थित हैं, वहां आपातकालीन संसाधनों की बेहतर व्यवस्था की आवश्यकता है। नदी तट के पास हाईड्रेट जैसी सुविधाओं का विकास भी समय की मांग बताया जा रहा है, ताकि आगजनी जैसी घटनाओं में त्वरित पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
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