सारंगढ़-बिलाईगढ़ 23 अप्रैल 2026/ जिला कृषि कार्यालय में एक मामूली शिकायत ने ऐसा विस्फोट किया कि सीधे निलंबन तक मामला पहुंच गया और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हाथ उठाने वाले ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी प्रवीण पटेल की कुर्सी चली गई, पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब पत्रकार पोश राम साहू एक पीड़ित किसान की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में अटकी राशि की शिकायत को लेकर कार्यालय पहुंचे, मकसद था तकनीकी कारण जानना और समाधान निकलवाना, लेकिन बातचीत के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अधिकारी प्रवीण पटेल ने अपना आपा खो दिया, पहले तीखी बहस हुई फिर अभद्र भाषा का इस्तेमाल हुआ और देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया, सरकारी दफ्तर के भीतर हुई इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया और पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए, घटना की खबर तेजी से फैली और मामला जिला प्रशासन के शीर्ष तक पहुंचा, कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने बिना समय गंवाए पूरे मामले को गंभीरता से लिया, तत्काल जांच के आदेश दिए और साफ संदेश दिया कि अनुशासनहीनता और सत्ता के दुरुपयोग पर अब जीरो टॉलरेंस रहेगा, जांच में आरोप सही पाए गए तो उप संचालक कृषि विभाग ने कलेक्टर की मंजूरी के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन और सेवा आचरण के विपरीत व्यवहार के आधार पर प्रवीण पटेल को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, इस कार्रवाई के बाद जिले के पत्रकारों में संतोष और राहत का माहौल है और इसे केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है, इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि सरकारी पद अब दबंगई का लाइसेंस नहीं है और अगर कोई जनसेवक जनता या पत्रकार पर हाथ उठाता है तो कार्रवाई तय है—“कानून के सामने हर कुर्सी छोटी है।”


