बिलासपुर 6 मई 2026/ खनिज विभाग द्वारा अवैध मिट्टी उत्खनन पर कार्रवाई के दावों के बीच महमंद क्षेत्र में लगातार हो रही खुदाई ने प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पिछले एक वर्ष से मिट्टी की अवैध खुदाई जारी है, जिससे समतल मैदान अब गहरे गड्ढों में तब्दील होकर तालाब जैसा स्वरूप ले चुका है। विभाग का कहना है कि उसने विभिन्न मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब 9 लाख रुपये की पेनाल्टी वसूली की है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2025-26 में अवैध उत्खनन से जुड़े 24 प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की गई है, जिसमें लाखों रुपये की समन शुल्क वसूली गई। साथ ही नियमित जांच और निरीक्षण अभियान चलाने की भी बात कही गई है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश करती है। महमंद-देवकछार क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई की जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगातार हो रहे उत्खनन से न केवल जमीन की प्राकृतिक संरचना बिगड़ी है, बल्कि बरसात के दौरान इन गड्ढों में जलभराव से दुर्घटनाओं और नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है। सूत्रों का कहना है कि अवैध खनन को छिपाने के लिए कुछ स्थानों पर धार्मिक निर्माण जैसे मंदिर का सहारा लिया गया है, जिससे कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है। यह भी सामने आया है कि कई जगहों पर बिना अनुमति ईंट निर्माण के लिए मिट्टी का दोहन किया जा रहा है।
विभाग का पक्ष
खनिज विभाग का दावा है कि अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है और दोषियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने यह भी कहा कि पारंपरिक कुम्हारों को ईंट निर्माण की सीमित छूट दी गई है और उसके दुरुपयोग की स्थिति में कार्रवाई की जाती है।
सवाल बरकरार
अगर कार्रवाई हो रही है, तो अवैध खुदाई क्यों जारी है?
क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है?
स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका से कैसे इनकार किया जा सकता है?
यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है और अवैध खनन पर प्रभावी रोक के लिए ठोस और पारदर्शी कार्रवाई की मांग करता है।






