रायपुर 6 मई 2026/ राजधानी रायपुर से सामने आया एक मामला पुलिस विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। चतुर्थ फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (POCSO कोर्ट) ने रायपुर पुलिस से जुड़े छह अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला छेड़छाड़, मारपीट, अवैध रूप से रोककर रखने और बच्चों से जुड़े संवेदनशील कानूनों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा बताया जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
यह पूरा मामला बुलंद छत्तीसगढ़ की संपादक सुनीता पांडेय द्वारा अदालत में दायर परिवाद के बाद सामने आया। परिवाद उनके अधिवक्ता आशिष कुमार मिश्रा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हुए गंभीर अपराध किए। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के तहत आरोपियों को पहले अपना पक्ष रखने का अवसर देने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने इन 6 लोगों को भेजा नोटिस
- शंकर ध्रुव – एएसआई, थाना माना
- मुकेश सोरी – क्राइम ब्रांच, रायपुर
- सबूरी शंकर – ट्रांसजेंडर, क्राइम ब्रांच
- मुनीर रज़ा – क्राइम ब्रांच
- नीलम कुजूर – थाना DD नगर
- मुकेश बांधे – कांस्टेबल, थाना DD नगर
किन धाराओं के तहत लगाए गए आरोप
परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई गंभीर धाराओं का हवाला दिया गया है। इनमें शामिल हैं—
- मारपीट और गंभीर चोट : धारा 115(2), 324, 332, 333
- अश्लील गाली-गलौज और अपमान : धारा 294
- अवैध रूप से बंधक बनाना : धारा 127(2), 331(2)
- महिला की गरिमा से जुड़ी धाराएं : धारा 75(1)(w), 76 और 79
- POCSO एक्ट : धारा 12
- किशोर न्याय अधिनियम 2015 : धारा 75
अदालत ने 2 मई 2026 को पारित आदेश में कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत किसी भी आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेने से पहले उसका पक्ष सुनना आवश्यक है। इसी प्रक्रिया के तहत सभी आरोपियों को परिवाद पत्र और उससे जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे अदालत में अपना जवाब पेश कर सकें।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
इस चर्चित मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को निर्धारित की गई है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि अदालत इन आरोपों पर आपराधिक संज्ञान लेती है या नहीं।
मामला क्यों बना चर्चा का विषय?
- पुलिस विभाग से जुड़े लोगों पर लगे गंभीर आरोपों ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद यह शुरुआती चर्चित मामलों में गिना जा रहा है।
- POCSO एक्ट और किशोर न्याय कानून की धाराओं के कारण मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
रायपुर में यह मामला अब सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं बल्कि पुलिस व्यवस्था और जवाबदेही पर बड़ी बहस का कारण बनता जा रहा है। आने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि मामला आगे किस दिशा में बढ़ता है।






