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Home»छत्तीसगढ़»विश्वविद्यालय प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि विद्या का आध्यात्मिक आलय है” : प्रो बाजपेई
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

विश्वविद्यालय प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि विद्या का आध्यात्मिक आलय है” : प्रो बाजपेई

HD MAHANTBy HD MAHANT16/04/2026 - 5:57 AM
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बिलासपुर  16 अप्रैल 2026/ अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ (ए.डी.एन.) बाजपेयी के पदमुक्ति अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। शिक्षाविद्, दार्शनिक और कुशल प्रशासक के रूप में आचार्य बाजपेयी के पांच वर्षों के ऐतिहासिक कार्यकाल की उपलब्धियों को याद करते हुए विश्वविद्यालय परिवार ने उन्हें अपनी गहरी कृतज्ञता ज्ञापित की।कार्यक्रम का शुभारंभ कुलसचिव डॉ. तर्निश गौतम के स्वागत उद्बोधन से हुआ। कार्यक्रम के समन्वयक संगणक विभाग के डीन डॉ. एच.एस. होता रहे, जबकि मंच संचालन वाणिज्य विभाग के डॉ. अतुल दुबे ने अपनी प्रभावी शैली में किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारी, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।प्रशासनिक उपलब्धियों और मानवीय संवेदनाओं का संगम
विभिन्न विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने आचार्य बाजपेयी के साथ अपने मर्मस्पर्शी संस्मरण साझा किए। वक्ताओं ने उनके कार्यकाल को विश्वविद्यालय का ‘स्वर्णकाल’ बताते हुए रेखांकित किया कि कैसे उन्होंने कर्मचारियों के वेतनमान में वृद्धि, स्थायी एवं अस्थायी कर्मियों के हितों का संरक्षण, पदोन्नति प्रक्रियाओं का सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध क्रियान्वयन, पुराने भवन से नवीन परिसर में सुचारू स्थानांतरण, संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग, संकट प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन तथा वित्तीय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण आयामों में उत्कृष्ट योगदान दिया। उन्होंने एक मनोवैज्ञानिक , सहानुभूतिपूर्ण एवं सशक्त शैक्षणिक वातावरण का निर्माण किया।‘अनुशासन, करुणा और उत्कृष्टता’ — संस्थान की आत्मा वर्तमान कुलपति प्रो. एल.पी. पटेरिया ने अपने उद्बोधन में आचार्य बाजपेयी को “एक सशक्त शैक्षणिक इकोसिस्टम” की संज्ञा दी। उन्होंने कहा, “आचार्य जी ने हमें सिखाया कि बिना किसी अपेक्षा के निरंतर प्रगति पथ पर कैसे बढ़ा जाता है। उनके द्वारा स्थापित ‘अनुशासन, करुणा और उत्कृष्टता’ के तीन बीज-मंत्र अब इस विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति और आत्मा बन चुके हैं, जिन्हें हम आगे भी अक्षुण्ण बनाए रखेंगे।”आचार्य बाजपेयी ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत की। उन्होंने 100 करोड़ रुपये के निर्माणाधीन कार्यों 127 एकड़ भूमि के आवंटन, ट्रांजिट गेस्ट हाउस तथा कुलपति आवास की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने पदोन्नति में विलंब को अनुचित बताते हुए कहा कि यह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर प्रोफेसर तक का हक है और इसे समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।उन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रिकाओं के प्रकाशन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा नैक जैसी प्रक्रियाओं पर बल दिया। उन्होंने पूर्व कुलसचिवों सुधीर शर्मा तथा शैलेंद्र दुबे के योगदान को भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।“पद से मुक्त हो रहा हूँ, हृदय से नहीं”दार्शनिक अंदाज में आचार्य बाजपेयी ने कहा, “मैं एक आध्यात्मिक व्यक्ति हूँ। मेरे लिए प्रत्येक गोधूलि बेला ‘अंतिम बेला’ और प्रत्येक उषा काल ‘प्रथम काल’ की तरह रहा। विश्वविद्यालय प्रशासनिक इकाई मात्र नहीं, बल्कि विद्या का आध्यात्मिक आलय है, जहाँ आध्यात्मिक प्रबंधन की भावना से कार्य होना चाहिए।”उन्होंने बताया कि उनका सेवानिवृत्ति वर्ष 2021 में निर्धारित था, किंतु शासन द्वारा विस्तार प्रदान किया गया। पद से मुक्त होते हुए उन्होंने कहा, “मैं पद से मुक्त हो रहा हूँ, इस परिवार से नहीं। यदि मानवीय दुर्बलतावश मुझसे कोई त्रुटि हुई हो, तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।” उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से भावुक अपील की कि वे भविष्य में भी सेवा का अवसर प्रदान कर उन्हें अनुग्रहित करेंगे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन श्री मनोज सिन्हा द्वारा किया गया।

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