रायपुर 5 फरवरी 2026/राज्यसभा चुनाव को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस ने एक बार फिर वरिष्ठ आदिवासी महिला नेता Phulo Devi Netam को प्रत्याशी बनाकर कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी का यह फैसला केवल एक सामान्य राजनीतिक निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा की सीटें अक्सर पार्टी के भीतर नए चेहरों को अवसर देने या अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम बनती हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस किसी नए नेता को उम्मीदवार बनाती, तो लंबे समय से सक्रिय वरिष्ठ नेताओं के बीच असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। वहीं, अगर किसी बाहरी राज्य के नेता को यह मौका दिया जाता, तो प्रदेश संगठन में इसे लेकर विवाद और नाराजगी बढ़ने की संभावना भी बन सकती थी।
इसी संभावित असंतोष से बचने के लिए कांग्रेस ने एक सुरक्षित और संतुलित विकल्प के तौर पर फूलोदेवी नेताम को पुनः उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है। वे छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ आदिवासी महिला नेताओं में गिनी जाती हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। उनके अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व को देखते हुए पार्टी का यह कदम संगठन के विभिन्न वर्गों को संतुष्ट करने वाला माना जा रहा है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी समाज की निर्णायक भूमिका रही है। ऐसे में एक आदिवासी महिला नेता को फिर से राज्यसभा भेजने का निर्णय सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संदेश दोनों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
कुल मिलाकर कांग्रेस का यह कदम दर्शाता है कि पार्टी ने संभावित विवादों से बचते हुए ऐसा रास्ता चुना है, जो संगठनात्मक संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक व्यावहारिकता—तीनों को साधने की कोशिश करता है।

