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हायर सेकंडरी स्कूल घरजरा में विश्व स्कार्फ दिवस की धूम

स्कार्फ के रंग में रंगे बच्चों ने बनाया मानव पुष्प


देवनारायण कर्ष/सरसीवा:- शाउमावि घरजरा में विश्व स्कार्फ दिवस जिला प्रशिक्षण आयुक्त शंकर लाल साहू के मुख्य आतिथ्य में , शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के अध्यक्ष उमेश साहू एवं शिक्षाविद रामदयाल साहू के विशिष्ट आतिथ्य में , संस्था प्रमुख एवं ग्रुप लीडर पवन कुमार दीवान के अध्यक्षता में तथा स्काउट मास्टर पूनम सिंह साहू के मार्गदर्शन में मनाया गया।


विश्व स्कार्फ दिवस का शुभारंभ अतिथियों को स्कार्फ पहना कर एवं तिलक लगाकर किया गया। इस अवसर पर शंकर लाल साहू ने कहा कि इसे केवल गले पर ही नहीं पहना जाता बल्कि यह बहु उपयोगी है । स्काउट इसका उपयोग पट्टी बांधने, स्ट्रेचर बनाने आदि विविध कार्यों में करते हैं। स्काउट मास्टर पूनमसिंह साहू ने बताया कि सन 1907 में 29 जुलाई से 9 अगस्त तक स्काउटिंग के जन्मदाता बेडेन पावेल द्वारा ब्राउन सी द्वीप पर 20 बच्चों को लेकर पहला प्रयोगात्मक शिविर लगाया गया, जो सफल रहा । इसके पश्चात भारत में विभिन्न जगहों पर लड़के एवं लड़कियों की अलग-अलग टुकड़ियां बनाकर स्काउट और गाइड दल का गठन हुआ। बाद में 7 नवंबर सन 1950 को सभी स्काउट गाइड को विलय कर भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की स्थापना की गई । विश्व स्कार्फ दिवस प्रत्येक वर्ष 1 अगस्त को मनाया जाता है। संस्था प्रमुख पवन कुमार दीवान ने बताया कि स्काउटिंग बच्चों में शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक विकास कर राष्ट्र व अंतराष्ट्रीय स्तर पर योगदान हेतु एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायता करता है। मुक्ति प्रकाश एक्का ने कहा कि हमारे विश्व में स्काउटिंग के कारण लोगो के जीवन में बदलाव आया है। स्काउट मास्टर पूनम सिंह साहू द्वारा गाइड कैप्टन श्रीमती सरोजनी बरिहा, श्रीमती अभिलाषा चौरसिया, गोपाल केवट एवम स्काउट्सके सहयोग से विद्यार्थियों को स्कार्फ बनवाकर सभी को पहनाया गया। बच्चो ने स्काउट स्कार्फ के साथ मानव पुष्प बनाकर एक दूसरे को सैल्यूट किए। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया गया। कार्यक्रम का संचालन पीएस साहू द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में व्याख्याता अभिलाषा शर्मा, ज्योति एक्का, शिक्षक कमलेश साहू, लक्ष्मण कुमार, उमा सिदार, लवकुमार जायसवाल, स्काउट नीरज साहू, महेंद्र प्रताप, उमेश बारिक, रमेश बरिहा,जितेंद्र साहू, विकास, विश्वनाथ आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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