बिलासपुर। पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि वर्ष 2026 का प्रथम चंद्र ग्रहण आगामी 3 मार्च मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। विशेष बात यह है कि इसी दिन रंगों का त्योहार होली भी मनाया जाएगा। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा, जिसके कारण इसका धार्मिक और सूतक प्रभाव मान्य होगा एवं रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा।
ग्रहण काल में करने योग्य कार्य
ग्रहण के दौरान मंत्र जप और ध्यानः ग्रहण के दौरान अपने इष्ट देव का ध्यान करें। मंत्र जप मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करता है। सूतक लगने से पूर्व ही दूध, दही, अचार और पीने के पानी में कुशा (घास) या तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए। मान्यता है कि इससे ग्रहण की किरणों का दुष्प्रभाव भोजन पर नहीं पड़ता।
सूतक काल में क्या न करें
शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल को एक “अशुद्ध” समय माना जाता है जिसमें वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। सूतक काल और ग्रहण के दौरान भोजन करना वर्जित है। बीमार, वृद्ध और बच्चों को छोड़कर अन्य व्यक्तियों को इस नियम का पालन करना चाहिए। साथ ही, ग्रहण के दौरान सोने से भी बचना चाहिए। सूतक लगते ही घर के मंदिरों को पर्दे से ढक देना चाहिए। इस दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करना मना है। गर्भवती महिलाओं को सुई, चाकू, कैची जैसी धारदार वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। सूतक काल में तुलसी के पौधे को स्पर्श करना या उसके पत्ते तोड़ना वर्जित है।
ग्रहण का समय और गणना
सूतक काल प्रारंभः 3 मार्च, सुबह 09:07 बजे से। ग्रहण का समय 3 मार्च, शाम 06:07 बजे से। शाम 06:26 बजे, एवं ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति) शाम 06:45 बजे चंद्र ग्रहण का सूतक प्रा ग्रहण प्रारंभ होने से 9 घंटे पूर्व लग जाता है। अतः नि प्रातः 9 बजकर 7 मिनट से ही मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।
मोक्ष के बाद शुद्धिकरण प्रक्रिया
शाम 06:45 बजे ग्रहण समाप्ति होगा। ग्रहण के स तुरंत बाद पूरे परिवार को स्नान कर सफेद वस्तुओं चावल, दूध, चीनी या चांदी का दान करना फलदायी है क्योंकि चंद्र ग्रहण का सीधा संबंध चंद्रमा और मन से होता है। पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। मंदिर की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराकर नवीन वस्त्र पहनाएं और फिर आरती करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद ही ताजा भोजन बनाकर ग्रहण करना चाहिए।

