
बिलासपुर 11 मार्च 2026/ अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय ने मातृशक्ति, महिला सम्मान और सशक्तिकरण का एक समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर पुष्पित हो उठा और मंच पर गणमान्य अतिथियों, शिक्षकगण और छात्र-छात्राओं ने मिलकर महिलाओं के अद्वितीय योगदान और समाज में उनके महत्व को सराहा।
उद्घाटन और अतिथियों का स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति आचार्य अरुण दिवाकरनाथ वाजपेयी और कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम के आत्मीय स्वागत के साथ हुई। उपकुलसचिव श्रीमती नेहा राठिया को कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया गया, जबकि डॉ. हमीद अब्दुल्लाह ने संयोजन समिति के सभी अतिथियों का सम्मानपूर्वक मंच पर आगमन सुनिश्चित किया।मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्रेया कश्यप (एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस) उपस्थित थीं। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. शालिनी शुक्ला (असिस्टेंट लाइब्रेरियन), नेहा यादव (सचिव), डॉ. रश्मि गुप्ता (कंप्यूटर साइंस), श्रीमती पूजा पाण्डेय (एसोसिएट प्रोफेसर, वाणिज्य एवं वित्तीय अध्ययन), श्रीमती रीवा कुलश्रेष्ठ (असिस्टेंट प्रोफेसर, फूड प्रोसेसिंग एंड टेक्नोलॉजी) और डॉ. सीमा बेलोरकर (एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स) का आत्मीय स्वागत किया गया। मंच संचालन स्वाति रोज टोपो (असिस्टेंट प्रोफेसर) द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।
समारोह का आरंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पार्चन और दीप प्रज्वलन से हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का संदेश और थीम
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति का उत्सव है। इस वर्ष की थीम “Gift to Gain” महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संसाधन, अवसर और सहयोग प्रदान करने पर केंद्रित रही। विश्वविद्यालय गीत ने सभी उपस्थित लोगों को छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संस्कृति और मातृशक्ति की महिमा से जोड़ दिया।
विशिष्ट वक्ताओं के मुख्य संदेश
• श्रीमती पूजा पाण्डेय: स्वागत भाषण में उन्होंने कुलपति और कुलसचिव का अभिनंदन करते हुए महिला सम्मान को विश्वविद्यालय की गरिमा का प्रतीक बताया।• श्रीमती नेहा यादव: उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि अधिकारों को समझने का अवसर है। उन्होंने विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने पर जोर दिया।• श्रीमती रीवा कुलश्रेष्ठ: मातृशक्ति को समाज की आधारशिला बताते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय के “किलकारी कार्यक्रम” जैसी सफल पहलों का उल्लेख किया।• डॉ. रश्मि गुप्ता: उन्होंने अर्धनारीश्वर की भारतीय अवधारणा और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की वैश्विक उत्पत्ति के ऐतिहासिक संदर्भों को साझा किया।• डॉ. सीमा बेलोरकर: ‘Gift to Gain’ थीम की व्याख्या करते हुए उन्होंने आर.के. लक्ष्मण के ‘कॉमन मैन’ का उदाहरण दिया और बताया कि महिलाओं की ‘देने वाली’ प्रकृति ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।• डॉ. शालिनी शुक्ला: सावित्रीबाई फुले और रानी लक्ष्मीबाई जैसी महान विभूतियों का स्मरण करते हुए उन्होंने आत्मनिर्भरता पर एक ओजस्वी कविता प्रस्तुत की।• डॉ. श्रेया कश्यप: उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रभक्ति और मातृशक्ति का अटूट संगम बताया।• श्रीमती नेहा राठिया: अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सहभागिता में स्त्री-पुरुष सहयोग को राष्ट्र की उन्नति के लिए अनिवार्य बताया।
नेतृत्व का मार्गदर्शन
कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम ने सभी मातृशक्तियों को नमन करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के बिना किसी भी समाज की सर्वांगीण उन्नति असंभव है।कुलपति आचार्य अरुण दिवाकरनाथ वाजपेयी ने वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मातृशक्ति के बिना देश का विकास अधूरा है। उन्होंने 2047 के विकास मॉडल की सफलता के लिए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्यमिता से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि सशक्त महिलाओं की बढ़ती संख्या ही परिवार, समाज और राष्ट्र को मजबूती प्रदान करेगी।
धन्यवाद ज्ञापन एवं समापन
समारोह का समापन श्रीमती पल्लवी द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने नारी शक्ति पर एक भावपूर्ण कविता के साथ सभी अतिथियों, शिक्षकों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में यह आयोजन न केवल एक उत्सव रहा, बल्कि एक प्रेरणा पुंज बनकर उभरा, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि “नारी से ही हर घर और राष्ट्र महान है।”


