जगदलपुर 24 मार्च 2026 / बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है, जहां 87 लाख रुपये के इनामी 18 माओवादी कैडरों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया। इस सरेंडर के साथ ही माओवादी संगठन को सैन्य और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका लगा है।
जगदलपुर स्थित शौर्यभवन में आयोजित “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 18 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की। इनमें 7 महिला कैडर भी शामिल हैं, जो इस अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण में संगठन के शीर्ष स्तर के नेता भी शामिल हैं। इनमें साउथ सब जोनल ब्यूरो इंचार्ज एसजेडसीएम पापाराव, डिवीजनल कमेटी सदस्य अनिल ताती और प्रकाश माड़वी जैसे वरिष्ठ कैडर शामिल हैं। इन सभी पर मिलाकर करीब 87 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिससे इस सरेंडर की अहमियत और बढ़ जाती है।
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने अपने पास मौजूद 18 घातक हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंप दिए। इनमें AK-47, SLR, INSAS राइफल, .303 राइफल, 9 एमएम पिस्टल, सिंगल शॉट हथियार और BGL लांचर शामिल हैं। इसके साथ ही 12 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए, जो संगठन की आर्थिक गतिविधियों पर सीधा असर डालता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह सरेंडर नक्सलियों की सैन्य क्षमता को लगभग शून्य के करीब ले जाने वाला कदम है। वर्ष 2024 से अब तक बस्तर संभाग में 2756 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जो इस अभियान की सफलता को दर्शाता है।
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने संगठन की विचारधारा और गतिविधियों को निरर्थक बताते हुए मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें आर्थिक सहायता, कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण कराना नहीं, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और विश्वास का माहौल तैयार करना है। लगातार चल रहे अभियानों और स्थानीय स्तर पर विश्वास निर्माण के प्रयासों का ही यह परिणाम है कि बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं।
यह आत्मसमर्पण साफ संकेत देता है कि बस्तर में नक्सलवाद अब अंतिम दौर में है—हथियार छोड़ना ही अब एकमात्र रास्ता बचा है।

