सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। शहर इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। गंदे पानी की आपूर्ति और लगातार गहराते बिजली संकट ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। शहर के कई इलाकों में नलों से दूषित और बदबूदार पानी आ रहा है, जो सीधे तौर पर संक्रामक बीमारियों और महामारी को आमंत्रण दे रहा है। वहीं दूसरी ओर, कई क्षेत्रों में पानी की बूंद-बूंद के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। इस बदहाल व्यवस्था को लेकर आम जनता में नगर निगम और बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है।विडंबना यह है कि हालात बद से बदतर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं, जिससे तंग आकर अब वार्ड पार्षदों ने भी घुटने टेक दिए हैं। विशेष रूप से तिफरा क्षेत्र और बिलासपुर शहर इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। गंदे पानी की आपूर्ति और लगातार गहराते बिजली संकट ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। शहर के कई इलाकों में नलों से दूषित और बदबूदार पानी आ रहा है, जो सीधे तौर पर संक्रामक बीमारियों और महामारी को आमंत्रण दे रहा है। वहीं दूसरी ओर, कई क्षेत्रों में पानी की बूंद-बूंद के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। इस बदहाल व्यवस्था को लेकर आम जनता में नगर निगम और बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। विडंबना यह है कि हालात बद से बदतर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं, जिससे तंग आकर अब वार्ड पार्षदों ने भी घुटने टेक दिए हैं। विशेष रूप से तिफरा क्षेत्र और वार्ड क्रमांक 5, 6, व 7 में स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहाँ लगातार 20 से 24 घंटे तक बिजली गुल रहने के कारण पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप हो चुकी है। नलों में पानी न आने से परेशान लोग भीषण गर्मी में पानी की तलाश में यहाँ-वहाँ भटकने को मजबूर हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोगों को दूसरे के घरों के बोरिंग और हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई नागरिकों को तो सुबह दैनिक कार्यों और ब्रश करने तक के लिए अपने रिश्तेदारों के घर जाना पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए अब टैंकरों के माध्यम से पानी पहुँचाने की कवायद की जा रही है, लेकिन क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिहाज से नगर निगम के ये टैंकर नाकाफी साबित हो रहे हैं। पार्षद लक्ष्मीनाथ साहू के अनुसार, निगम के पास संसाधनों की भारी कमी है, जिसके कारण जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए जब बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। इसी तरह की बदहाली सरकंडा क्षेत्र के वार्ड 62 स्थित कच्छ गुर्जर भवन के पीछे वाली गली में भी देखने को मिल रही है। यहाँ पिछले कई दिनों से नलों में बेहद गंदा, काला और बदबूदार पानी आ रहा है, जिसे देखकर ही बीमारी का खौफ पैदा हो जाए। इस क्षेत्र के लगभग 150 मकानों में रहने वाले परिवारों पर पीलिया, डायरिया और अन्य गंभीर जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय पार्षद सीमा राजेश शुक्ला ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम में शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की स्थिति देखकर ऐसा लगता है जैसे वह सीधे किसी गंदे नाले से आ रहा हो। इसके कारण मजबूरन लोगों को आसपास के निजी बोर का सहारा लेना पड़ रहा है। यह कोई पहला मौका नहीं है; करीब दो महीने पहले बंगालीपारा क्षेत्र से भी गंदे पानी का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट आज तक दबाकर रखी गई है। नगर निगम के कर्मचारी अब तक इस लीकेज या गंदे पानी के स्रोत का पता लगाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। इस संबंध में सब-इंजीनियर देवनारायण सिंह मरकाम का कहना है कि अशोकनगर से नेपाली मोहल्ला के बीच ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है, आशंका है कि वहीं कोई पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है। उन्होंने सोमवार को प्रभावित बोर के कनेक्शन को ‘अमृत मिशन’ योजना से जोड़ने का आश्वासन दिया है। वहीं, जोन कमिश्नर भूपेंद्र उपाध्याय का दावा है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, नए बोर खुदवाए गए हैं और अवैध नल कनेक्शन काटने का अभियान भी चलाया जा रहा है। हालांकि, धरातल पर इन दावों का कोई खास असर नहीं दिख रहा है और बिलासपुर की जनता बूंद-बूंद पानी और बिजली के लिए लगातार संघर्ष कर रही है।






