सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। नगर निगम सीमा में शामिल होने के वर्षों बाद भी तिफरा क्षेत्र के लगभग 50 हजार नागरिक मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या क्षेत्र में सार्वजनिक गार्डन और ओपन स्पेस की कमी को लेकर सामने आ रही है। स्थिति यह है कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुबह-शाम टहलने या ताजी हवा लेने के लिए चार से पांच किलोमीटर दूर शहर के अन्य उद्यानों का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तिफरा जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में अब तक एक भी व्यवस्थित गार्डन विकसित नहीं किया गया। जो पुराने खुले स्थान थे, वे भी अब अतिक्रमण और अव्यवस्थित उपयोग की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। बच्चों को खेलने के लिए सुरक्षित मैदान नहीं मिल पा रहे, जिसके कारण उन्हें सड़कों या गलियों में खेलना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। क्षेत्र के बुजुर्गों और महिलाओं ने बताया कि स्वास्थ्य के लिए सुबह की सैर और खुले वातावरण की आवश्यकता होती है, लेकिन गार्डन के अभाव में उन्हें मजबूरन शहर के अन्य हिस्सों की ओर जाना पड़ता है। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक उपेक्षा बताते हुए कहा कि नगर निगम बनने के बाद भी तिफरा को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकीं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार क्षेत्र में पहले से चिन्हित कुछ स्थानों पर गार्डन निर्माण की योजना बनी थी, लेकिन वह फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी। खाली पड़ी जमीनों पर अब निर्माण कार्य शुरू हो रहे हैं, जिससे भविष्य में सार्वजनिक उद्यान की संभावना भी समाप्त होती जा रही है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए जरूरी है गार्डन
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि गार्डन केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि स्वस्थ समाज की आवश्यकता है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल मैदान जरूरी हैं, वहीं बुजुर्गों को भी बैठने और टहलने के लिए सुरक्षित स्थान मिलना चाहिए।
नागरिकों ने उठाई मांग
क्षेत्रवासियों ने नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तिफरा में शीघ्र एक व्यवस्थित सार्वजनिक गार्डन विकसित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पहल नहीं की गई तो तेजी से बढ़ती आबादी के बीच आने वाली पीढ़ियों के लिए खुला वातावरण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।






