बिलासपुर 12 मई 2026/ शहर में विकास कार्यों की कछुआ चाल और गुणवत्ता से खुलेआम खिलवाड़ ने शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। अरपा नदी पर जिस बैराज का निर्माण शहर का जलस्तर सुधारने के लिए ₹100 करोड़ की भारी-भरकम लागत से किया गया था, वह अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अप्रैल 2026 में काम पूरा होने के महज कुछ ही दिनों के भीतर बैराज की सड़कें कई जगहों से उखड़ने और धंसने लगी हैं, जिसने सीधे तौर पर निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की साठगांठ की ओर इशारा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों का आक्रोश इस बात पर है कि जिस प्रोजेक्ट को 18 महीने में पूरा हो जाना चाहिए था, वह सालों की देरी के बाद भी घटिया निर्माण की भेंट चढ़ गया। इधर, सिर पर मंडराते मानसून ने शहरवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार जून के शुरुआती हफ्तों में बारिश की दस्तक तय है, लेकिन बिलासपुर की सूरत फिलहाल किसी मलबे के ढेर जैसी नजर आती है। राजकिशोर नगर से स्मृतिवन मार्ग हो या लिंगियाडीह और चिंगराजपारा का इलाका, हर तरफ सड़कें खुदी पड़ी हैं। महीनों से अधूरे पड़े नाला निर्माण और सड़क चौड़ीकरण के कार्यों ने धूल के गुबार पैदा कर दिए हैं, जिससे दुकानदारों का व्यापार ठप है और राहगीरों का दम घुट रहा है। धूल से सनी इन सड़कों पर अब बारिश के बाद कीचड़ का साम्राज्य होना तय माना जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा बढ़ गया है। सबसे भयावह स्थिति पेयजल की है, जहाँ सड़क निर्माण के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण मुख्य पाइपलाइनें जगह-जगह से तोड़ दी गई हैं। एक तरफ शहर की बड़ी आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ पाइपलाइन फटने से रोजाना हजारों लीटर साफ पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है। प्रशासन की इस घोर लापरवाही ने आम जनता के जीवन को नारकीय बना दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या समय सीमा और गुणवत्ता का उल्लंघन करने वाली इन एजेंसियों पर कोई कठोर कार्रवाई होगी, या फिर शहर की जनता हर साल की तरह इस बार भी भ्रष्टाचार और अधूरी व्यवस्थाओं के बीच डूबने को मजबूर होगी।






