रायगढ़ 13 मई 2026/ एक कमरे में नोट गिनने की मशीन चल रही थी, करोड़ों की काली कमाई पैकेटों में भरकर छिपाई जा रही थी और मोबाइल स्क्रीन पर IPL सट्टे का पूरा खेल ऑपरेट हो रहा था… लेकिन रायगढ़ पुलिस की रेड ने उस “ब्लैक मनी सिंडिकेट” की परतें उधेड़ दीं, जिसने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे को हवाला और संगठित आर्थिक अपराध के बड़े नेटवर्क में बदल दिया था। रायगढ़ पुलिस ने 13 मई को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा, हवाला और ब्लैक मनी के संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया और तीन बड़े आरोपियों करन चौधरी उर्फ करन अग्रवाल पिता संजय चौधरी उम्र 29 वर्ष निवासी श्याम नगर ढिमरापुर चौक रायगढ़, पुष्कर अग्रवाल पिता सुनील अग्रवाल उम्र 26 वर्ष निवासी फ्लैट नंबर 505 कृष्ण प्राइड टावर रायगढ़ और सुनील कुमार अग्रवाल पिता स्वर्गीय सूरजभान उम्र 58 वर्ष निवासी फ्लैट नंबर 505 कृष्ण प्राइड टावर रायगढ़ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 करोड़ 2 लाख 81 हजार 300 रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन, 4 मोबाइल फोन और अन्य अहम साक्ष्य जब्त किए हैं। कुल जब्ती 1 करोड़ 3 लाख 86 हजार 300 रुपये बताई गई है। जांच में खुलासा हुआ कि यह सिर्फ IPL सट्टेबाजी का मामला नहीं था, बल्कि सट्टे की काली कमाई को हवाला चैनल के जरिए “व्हाइट” करने का पूरा संगठित नेटवर्क रायगढ़ से लेकर रायपुर, सक्ती, खरसिया, बिलासपुर और दिल्ली तक फैला हुआ था। पूरा मामला 26 अप्रैल से शुरू हुआ जब साइबर सेल, कोतवाली और घरघोड़ा पुलिस ने संयुक्त दबिश देकर ऑनलाइन IPL सट्टा नेटवर्क पर कार्रवाई की थी। उस दौरान छह आरोपियों सोनू देवांगन पिता रूपेंद्र देवांगन उम्र 21 वर्ष निवासी नया गंज कोष्टापारा रायगढ़, हर्षित देवांगन पिता स्वर्गीय अनंत राम देवांगन उम्र 24 वर्ष निवासी नया गंज कोष्टापारा रायगढ़, भरत गोयल पिता सुभाष गोयल उम्र 22 वर्ष निवासी लैलूंगा रोड घरघोड़ा, गौतम भोजवानी पिता श्याम भोजवानी उम्र 26 वर्ष निवासी कन्या शाला के पीछे साईराम कॉलोनी घरघोड़ा, लक्ष्मीनारायण सिदार पिता चंदन सिंह उम्र 28 वर्ष निवासी वार्ड नंबर 13 घरघोड़ा और सागर गुप्ता पिता विनोद गुप्ता उम्र 27 वर्ष निवासी वार्ड नंबर 2 कन्या शाला के पीछे घरघोड़ा को पकड़ा गया था। शुरुआती कार्रवाई में मोबाइल, डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और नगदी बरामद हुई थी, लेकिन पूछताछ में जो नाम सामने आए, उन्होंने पुलिस को सीधे बड़े सिंडिकेट तक पहुंचा दिया। गिरफ्तार आरोपियों ने रायगढ़ के खाईवाल करन चौधरी और फरार आरोपी जसमीत सिंह बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार का नाम उगला, जिसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और फाइनेंशियल एनालिसिस के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू किया। जांच में सामने आया कि करन चौधरी लंबे समय से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा ऑपरेट कर रहा था और सट्टे से आने वाले करोड़ों रुपये सीधे अपने पास रखने के बजाय परिचित कारोबारियों, पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर और अन्य चैनलों में कैश डंप करता था। इसके बाद वही रकम हवाला नेटवर्क के जरिए आगे ट्रांसफर होती थी ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। पुलिस को सबसे बड़ा सुराग कृष्ण प्राइड टावर से मिला, जहां आरोपी पुष्कर अग्रवाल और उसके पिता सुनील अग्रवाल पूरे मनी मूवमेंट नेटवर्क को संभाल रहे थे। पुलिस ने फ्लैट में छापा मारकर सुनील अग्रवाल के कब्जे से 50 लाख रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन और मोबाइल फोन जब्त किया, जबकि पुष्कर अग्रवाल के कब्जे से 52 लाख 60 हजार रुपये और दो मोबाइल बरामद किए गए। इलेक्ट्रॉनिक डाटा, यूपीआई ट्रांजेक्शन, चैट रिकॉर्ड और फाइनेंशियल दस्तावेजों ने साफ कर दिया कि यह महज जुआ नहीं बल्कि संगठित आर्थिक अपराध का बड़ा सिंडिकेट था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपने निजी खातों का इस्तेमाल करने के बजाय कर्मचारियों, परिचितों और सहयोगियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का उपयोग कर रहे थे ताकि ट्रांजेक्शन ट्रैक न हो सके। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक करन चौधरी पर पहले से ही जुआ-सट्टा के चार मामले दर्ज हैं। इसके अलावा उस पर मारपीट, रंगदारी, आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने, अपहरण और अन्य गंभीर अपराधों के केस भी दर्ज हैं। पुलिस उसके खिलाफ पहले धारा 110 CrPC और 107, 116(3) CrPC के तहत भी कार्रवाई कर चुकी है। लगातार आपराधिक गतिविधियों और आर्थिक लाभ के लिए संगठित नेटवर्क चलाने के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 यानी संगठित अपराध की धारा भी जोड़ दी है। मामले में फरार आरोपी जसमीत सिंह बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार की तलाश तेज कर दी गई है, जिसे इस पूरे सिंडिकेट की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। पूरे मामले की मॉनिटरिंग खुद एसएसपी शशि मोहन सिंह कर रहे हैं। एडिशनल एसपी अनिल सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा और डीएसपी साइबर उन्नति ठाकुर के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक की टीम लगातार नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। रायगढ़ पुलिस का साफ संदेश है कि अब जिले में सट्टा, हवाला, ब्लैक मनी और संगठित आर्थिक अपराध के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचेगा। फिलहाल इस कार्रवाई ने रायगढ़ में चल रहे करोड़ों के “सट्टा साम्राज्य” की ऐसी काली तस्वीर सामने ला दी है, जिसने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है।






