( सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” )बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 24 मई 2026
पात्र:
रामू, बिट्टू, माई, बाबा, सरपंच, मास्टर जी,
नया पात्र:
नेटवर्क देवता (कॉमिक किरदार)
टिकटॉक/रील गुरु (ओवरएक्टिंग वाला)
दृश्य 1: “लास्ट गेम के कहानी”
(रामू मोबाइल म डूबे हवय)
माई:
रामू! खाना खा लेना रे ,खाना ह ठंडा होगे हवय!
रामू:
अभी आवथौं माई… लास्ट गेम हेवय
(5 बार वही बात)
माई:
तोर “लास्ट गेम” त रामायण ले घलो लम्बा होगे हावय रे लइका
दृश्य 2: “रील बनाना”
(रामू कैमरा ऑन करथे)
रामू (डांस करत):
“मोला फेमस होना हे!”
(फिसल जाथे)
बिट्टू:
फेमस नई, जमीन म सपाट होके गिरबे
अउ कुछू नइ जानें! निपोर
दृश्य 3: “नेटवर्क के खोज”
(रामू छत, पेड़, खंभा चढ़त हे)
रामू:
अरे सिग्नल काबर नई आथे!
(अचानक “नेटवर्क देवता” हर परगट हो जाथे )
नेटवर्क देवता:
कइसे रे लइका काबर बुलावत हस मोला?
रामू:
नेट दे दे देवता!
नेटवर्क देवता:
पहिली मोबाइल ल छोड़बे, तभै तौ सिग्नल मिलही
(सब हँसथें)
दृश्य 4: “घर म मोबाइल युद्ध”
(बाबा मोबाइल छीन लेथे)
रामू:
मोबाइल ल दे दे न ग !
बाबा:
नई!
(दोनों खींचतान… माई फेर आ जाथे वो हर दुनों के बीच म फंस जाथे )
माई:
अरे मोर ल हाथ छोड़व न ग! मोबाइल त नई, मैं हर टूट जावथों!
दृश्य 5: “रील गुरु के क्लास”
(ओवरस्टाइल गुरु एंट्री)
गुरु:
आज सिखाहूँ – 10 सेकंड म फेमस कैसे होए जाथे!
रामू:
कइसे?
गुरु:
ओ अइसे पहिली अजीब चेहरा बनाव, फेर गिर जाव
(सब गिर-गिर के एक्टिंग करत हैं)
बिट्टू:
ये हर तौ पढ़ाई नई लागथे गुरु जी,ए हर तौ जानी-मानी पागलपन के ट्रेनिंग लगथे!
दृश्य 6: “ऑनलाइन क्लास”
(रामू ऑनलाइन पढ़ई करथे, पर गेम खेलत पकड़ा जाथे)
मास्टर जी (मोबाइल म):
रामू, ध्यान ल दे न रे बपरा!
रामू:
हव सर… (गेम खेलत)
मास्टर जी:
स्क्रीन ल शेयर कर!
(गेम दिख जाथे )
मास्टर जी:
इही पढ़ई हेवय या लड़ई?
दृश्य 7: “पंचायत मीटिंग”
सरपंच:
मोबाइल के लत खतम करना परही!
(सब ताली बजाथें)
(सरपंच खुद मोबाइल निकाल के सेल्फी लेथे)
बिट्टू:
अरे सरपंच जी! नियम खुदे तोड़त हवव!
सरपंच:
अरे ये “जरूरी काम” हेवय रे लइका
तैं अभी नइ जानबे ।(सरपंच अइसन कइ के फेर मोबाइल म लग जाथे)
दृश्य 8: “मोबाइल बंद दिवस”
(गाँव वाले मोबाइल जमा करथें)
रामू:
अब का करबो रे बिटटू?
बिट्टू:
चल, असली दुनिया देखबो अउ का
(सब लोग एक-दूसरे से बात करना सीखते हैं, हँसी-मजाक)
अंतिम दृश्य: “सुधार”
(रामू अब मोबाइल से काम सीखत हे)
रामू:
अब मोबाइल ले पढ़ई, काम, सब करहूँ
फालतू टाइम नई गंवावंव
माई:
अब बने लागथस रे बेटा
बाबा:
अब तोर दिमाग ठऊंकेच्च नेटवर्क म आ गे हावय (अइसन कई के हांसथे)
समापन संवाद (हास्य + संदेश):
रामू:
“मोबाइल म फंसे रहिबे त जिंदगी निकल जाही,
समझ के उपयोग करबे त जिंदगी बन जाही! हमर गांव अउ शहर के सब्बो लइका मनन एला जान लेवयं अउ समझ लेवयं ”





