Close Menu
The Bharat TimesThe Bharat Times
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर परम् जीवनम् योग केंद्र में हुआ भव्य आयोजन

21/06/2026 - 12:40 PM

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: धमतरी पुलिस ने योग अपनाकर फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य का दिया संदेश

21/06/2026 - 11:32 AM

21 जून विश्व योग दिवस पर विशेष- प्राचीन सनातन की देन है अप्रतिम योग

21/06/2026 - 8:23 AM
Facebook X (Twitter) Instagram
Sunday, June 21
Facebook X (Twitter) Instagram
The Bharat TimesThe Bharat Times
Demo
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • मध्य प्रदेश
  • राजनीति
  • मेरा शहर
The Bharat TimesThe Bharat Times
Home»छत्तीसगढ़»21 जून विश्व योग दिवस पर विशेष- प्राचीन सनातन की देन है अप्रतिम योग
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

21 जून विश्व योग दिवस पर विशेष- प्राचीन सनातन की देन है अप्रतिम योग

HD MAHANTBy HD MAHANT21/06/2026 - 8:23 AM
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”21 जून 2026/बिलासपुर/

योग प्रकृति का वह वरदान है,
जिसने अपना लिया इसे वह महान है।।..”योग” शब्द का उच्चारण होते ही हमारे मन में आसनों, प्राणायाम और ध्यान की छवि उभरती है, परंतु योग की वास्तविकता इससे कहीं अधिक गहरी, व्यापक और आध्यात्मिक है। योग न केवल शरीर और मन का संयोजन है, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन की प्रक्रिया है।
इसके प्राचीनतम गूढ़ अर्थों की खोज हमें वैदिक और उपनिषदिक ग्रंथों में मिलती है, जहाँ योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि ब्रह्म से एकत्व का साधन है।संस्कृत में “योग” शब्द की उत्पत्ति धातु “युज्” से हुई है, जिसका अर्थ है “जोड़ना”, “एकत्र करना” या “संयोजन”। परंतु यह केवल बाह्य तत्वों को जोड़ने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की एक आध्यात्मिक यात्रा है।ऋग्वेद, जो विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ है। यह ग्रंथ योग के बीज रूप में सूक्ष्म संकेत देता है – जहाँ ध्यान, एकाग्रता, और ब्रह्मचिंतन की बात की गई है।कठोपनिषद में योग को उस साधन के रूप में वर्णित किया गया है जिसके द्वारा जीवात्मा आत्मबोध और मोक्ष की ओर अग्रसर होती है:-

“तं योगमिति मन्यंते स्थिरमिन्द्रियधारणम् ।”

‌‌ अर्थात, इंद्रियों की स्थिरता को ही योग कहा गया है। वही पतंजलि योगसूत्र में गूढ़ परिभाषा में महर्षि पतंजलि ने योग के रहस्य को सूत्र रूप में प्रस्तुत किया है –

“योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः”

अर्थात योग वह है जिसमें चित्त की वृत्तियों का निरोध हो जाता है।प्राचीन ग्रंथों में योग केवल आसन या ध्यान नहीं था, बल्कि जीवन की समग्रता में एक दिव्य अनुशासन था। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग और ध्यानयोग जैसे मार्ग बताए।

“योगः कर्मसु कौशलम्”

इसका तात्पर्य यह है कि योग केवल ध्यान में बैठना नहीं, बल्कि जीवन के हर कर्म में संतुलन, विवेक और साक्षीभाव को धारण करना भी योग है।योग के प्राचीनतम गूढ़ अर्थ को केवल बौद्धिक रूप से समझना पर्याप्त नहीं इसे साधना अनुशासन और आत्मानुभूति द्वारा ही योग के प्राचीनतम गूढ़ अर्थ को केवल बौद्धिक रूप से समझना पर्याप्त नहीं, इसे साधना, अनुशासन और आत्मानुभूति द्वारा ही जाना जा सकता है। जब साधक अहंकार, वासनाएँ, और भौतिक इच्छाओं को पार कर चित्त की शुद्धता को प्राप्त करता है, तभी वह योग के उस शुद्धतम अनुभव को प्राप्त करता है – जहाँ “अहम् ब्रह्मास्मि “की अनुभूति होती है।
योग कोई सीमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा और ब्रह्म के बीच की वह सेतु है जो जीवन को अज्ञानता से ज्ञान, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाता है। इसके प्राचीनतम गूढ़ अर्थ को समझना केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि साधना, वैराग्य और आत्मनिष्ठा की मांग करता है।योग कोई सीमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा और ब्रह्म के बीच की वह सेतु है जो जीवन को अज्ञानता से ज्ञान, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाता है। इसके प्राचीनतम गूढ़ अर्थ को समझना केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि साधना, वैराग्य और आत्मनिष्ठा की मांग करता है।अतः, योग को केवल शरीर की चपलता तक सीमित न करें वह चेतना की गहराई में उतरने की एक यात्रा है, आत्मा के विस्मृति से स्मृति की ओर लौटने का मार्ग है।
योग के प्रथम गुरु (प्रथम “आदि गुरु”) के विषय में जब हम गूढ़ और प्राचीन दृष्टिकोण से विचार करते हैं, तो हमें वेदों, उपनिषदों, और तांत्रिक परंपराओं में उसका मूल स्वरूप मिलता है। योग का प्रारंभ किसी एक समय, स्थान या व्यक्ति से नहीं हुआ, यह सनातन ज्ञान है, जो स्वयं सृष्टि के साथ प्रकट हुआ। फिर भी, योग परंपरा में एक प्रथम गुरु के रूप में कुछ महान आत्माओं का उल्लेख मिलता है।
योग परंपरा के अनुसार, भगवान शिव को “आदि योगी” और “आदि गुरु” कहा जाता है। यह विश्वास हजारों वर्षों पुराना है और विशेषकर नाथ, शैव और तांत्रिक परंपराओं में गहराई से रचा-बसा है।पुरातन ग्रंथों और योगिक परंपरा में वर्णन मिलता है कि जब शिव ने पहली बार ब्रह्मांडीय चेतना में समाधि की अवस्था को प्राप्त किया, तो वे लाखों वर्षों तक मौन साधना में लीन रहे।उनके ध्यान की स्थिति इतनी गहन थी कि सृष्टि की शक्तियाँ तक थम गईं।कालांतर में सात महान ऋषि (जिन्हें सप्तर्षि कहा जाता है) शिव के समीप पहुँचे और ज्ञान प्राप्त करने की प्रार्थना की।बहुत समय बाद, शिव ने उन्हें अपना पहला शिष्य स्वीकार किया और योग के सात प्रमुख मार्गों की शिक्षा दी – जैसे हठ योग, राज योग, ज्ञान योग, भक्ति योग आदि।
शिव को योग का आदिकालीन स्रोत माना जाता है।आदि योगी और आदि गुरु।शिव केवल देवता नहीं, बल्कि योगिक चेतना का प्रतीक हैं।उन्हें पंचमुख (पाँच मुखों) वाला योग गुरु कहा जाता है, जो ज्ञान के पाँच स्तरों का प्रतिनिधित्व करते हैं।शिव की मुद्रा, विशेषकर “योग मुद्रा” (पद्मासन में ध्यानमग्न अवस्था), आज भी योग की आदर्श स्थिति मानी जाती है।
तांडव नृत्य को भी एक प्रकार की यौगिक ऊर्जा का रूप माना गया है – जिसमें सृजन, संरक्षण और संहार तीनों की लय होती है।हालाँकि शिव को योग का प्रथम गुरु माना जाता है, किंतु महर्षि पतंजलि को योग दर्शन का व्यावहारिक एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने वाला महान ऋषि माना जाता है। उन्होंने पतंजलि योगसूत्र के माध्यम से योग को “अष्टांग योग” के रूप में परिभाषित किया।
अतः”शिव हैं योग के आदि स्रोत और गुरु। तो वहीं”पतंजलि हैं योग के वैज्ञानिक प्रणालीकरण के अग्रदूत”।योग के प्रथम गुरु को लेकर जब हम गूढ़ और परंपरागत अर्थों में विचार करते हैं, तो स्पष्ट रूप से शिव ही योग के आदिगुरु के रूप में सामने आते हैं। उनका योग केवल आसन या ध्यान नहीं, बल्कि पूर्ण ब्रह्मांडीय चेतना की अभिव्यक्ति है।जब हम योग करते हैं, तो अनजाने में ही हम उस परंपरा से जुड़ते हैं जिसकी जड़ें स्वयं शिव की मौन समाधि से प्रारंभ होती हैं।
श्रीकृष्ण को भी योगी, योगेश्वर, और महायोगी माना जाता है। वास्तव में, भगवद्गीता में श्रीकृष्ण का पूरा उपदेश योग पर ही केंद्रित है। वे केवल एक धर्मगुरु या राजनेता नहीं, बल्कि योग के सिद्ध और पूर्ण ज्ञाता थे। उनकी संपूर्ण जीवन दृष्टि, कर्म पद्धति और आध्यात्मिक ज्ञान योग की चरम परिणति मानी जाती है।आइए इस पर थोड़ा गहराई से विचार करें।
ॐ श्रीकृष्णः योगेश्वर के रूप में इन्हे भगवद्गीता में “योगेश्वर” की उपाधि मिली हुई है।भगवद्गीता के अंतिम श्लोक (अध्याय 18, श्लोक 78) में संजय कहते हैं:-

“यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः
तत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥”

अर्थात जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर अर्जुन हैं, वहाँ निश्चित ही विजय, संपत्ति, नीति और अचल बुद्धि होती है।यहाँ श्रीकृष्ण को स्पष्ट रूप से “योगेश्वर”, अर्थात योग के ईश्वर कहा गया है – जो योग के सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता और सिद्ध पुरुष हैं।भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने योग के अनेक रूप बताएःजैसे कर्म योग इसमें बताया गया है कि निष्काम भाव से कर्म करना –

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”

ज्ञान योग:- इस योग विधा में आत्मा और ब्रह्म के ज्ञान के द्वारा मोक्ष प्राप्त करने की व्याख्या की गई है।
भक्ति योग:-इस योग में सम्पूर्ण समर्पण भाव से ईश्वर की आराधना की विधि है।
ध्यान योग:-इसके द्वारा एकाग्र चित्त से ध्यान, जिससे आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार होता है।
सांख्य योग:-यह ऐसा योग है जिसमें विवेक द्वारा प्रकृति और पुरुष (आत्मा) का भेद जानने की प्रक्रिया छुपी हुई है।श्रीकृष्ण कहते हैं: “योगः कर्मसु कौशलम्” योग कर्मों में कुशलता है।यह योग का अत्यंत व्यावहारिक और गूढ़ अर्थ है – जीवन में संतुलन, विवेक और समत्व बनाना ही सच्चा योग है।
श्रीकृष्ण स्वयं एक पूर्ण योगी थे, उन्होंने राजनीति में चातुर्य, प्रेम में माधुर्य, युद्ध में धैर्य, और साधना में वैराग्य का अद्भुत समन्वय किया यही एक पूर्ण योगी के लक्षण हैं।उनका जीवन संन्यास और गृहस्थ दोनों से परे था – वे लीलामय योगी थे, जो संसार में रहते हुए भी उससे निर्लिप्त थे।उन्होंने गीता के माध्यम से योग को जीवन दर्शन बना दिया, न कि केवल ध्यान या तपस्या तक सीमित रखा।
श्रीकृष्ण केवल योगी नहीं, योग के सम्राट, योगेश्वर हैं। जहाँ शिव आत्मा की गहराई में उतरने वाले मौन योगी हैं, वहीं कृष्ण जीवन के प्रत्येक क्षण को योग में परिणत करने वाले पूर्ण पुरुष हैं।शिव ध्यान के शिखर हैं, तो कृष्ण कर्म और ज्ञान के पथिक।इस प्रकार योग की परंपरा में शिव और कृष्ण दोनों की अपनी अनूठी भूमिका है – एक आदियोगी, दूसरा योगेश्वर हैं।

योग से मिलता जीवन को सार,
हर श्वास बने ईश्वर का उपहार,
चिंतन, चित्त और चेतन का संग,
योग है अमृत, नश्वरता में रंग
मोक्ष का ही द्वार है सच्चा योग।।

– सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
बिलासपुर छत्तीसगढ़

——–००००——

WhatsApp पर शेयर करें
HD MAHANT
Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

Related Posts

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर परम् जीवनम् योग केंद्र में हुआ भव्य आयोजन

21/06/2026 - 12:40 PM

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: धमतरी पुलिस ने योग अपनाकर फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य का दिया संदेश

21/06/2026 - 11:32 AM

प्लांट में बड़ा हादसा टला: मेंटेनेंस के दौरान गर्म स्पंज आयरन की चपेट में आए 3 कर्मचारी, सभी खतरे से बाहर

21/06/2026 - 8:20 AM

लखनी देवी मंदिर परिसर में चाकू लहरा कर डराते बदमाश को पुलिस ने किया गिरफ्तार

21/06/2026 - 8:19 AM

एम्बुलेंस के विलंब से पहुंचने के कारण मरीज की हुई मौत

21/06/2026 - 8:17 AM

सड़क पर मिले मवेशी अब होंगे स्थायी रूप से जब्त

21/06/2026 - 8:14 AM
Leave A Reply Cancel Reply

पोस्ट

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर परम् जीवनम् योग केंद्र में हुआ भव्य आयोजन

21/06/2026 - 12:40 PM

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: धमतरी पुलिस ने योग अपनाकर फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य का दिया संदेश

21/06/2026 - 11:32 AM

21 जून विश्व योग दिवस पर विशेष- प्राचीन सनातन की देन है अप्रतिम योग

21/06/2026 - 8:23 AM

प्लांट में बड़ा हादसा टला: मेंटेनेंस के दौरान गर्म स्पंज आयरन की चपेट में आए 3 कर्मचारी, सभी खतरे से बाहर

21/06/2026 - 8:20 AM

एच. डी. महंत
मुख्य संपादक

Official Address :
Shop No. 2, Ground Floor, Gokul Apartment, Near Shyam Nagar Chowk, Shyam Nagar, Telibandha Raipur, Chhattisgarh – 492013

Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
UDYAM-CG-33-0000933
June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
« May    
© 2026 The Bharat Times. Designed by Nimble Technology.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.