डॉ. सुरेंद्र दुबे ने साहित्य जगत में अमिट पहचान बनाई- डॉ विनय कुमार पाठक
बिलासपुर 27 जून 2026/ छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद द्वारा पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर डॉ. सुरेंद्र दुबे के साहित्यिक अवदान, व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।इस अवसर पर डॉ. विनय कुमार पाठक, कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज ने कहा कि “डॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपनी सृजनशीलता, सरलता और अद्भुत मंचीय प्रस्तुति से साहित्य जगत में अमिट पहचान बनाई। उनका साहित्य समाज को सकारात्मक ऊर्जा और संवेदनशीलता प्रदान करता है।”कार्यक्रम का संचालन करते हुए परिषद के अध्यक्ष डॉ. विवेक तिवारी ने कहा कि “पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव थे। उन्होंने अपनी हास्य-व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से समाज को नई दृष्टि दी तथा छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका साहित्य और व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।”वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राघवेंद्र दुबे ने कहा कि “डॉ. सुरेंद्र दुबे का जीवन साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण था। उनका रचनात्मक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”कवि सनत तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “डॉ. सुरेंद्र दुबे का व्यक्तित्व जितना विराट था, उतनी ही सरल उनकी जीवनशैली थी। वे युवा साहित्यकारों के लिए सदैव प्रेरणा और मार्गदर्शक बने रहेंगे।”इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर, डॉ ए.के यदु, डॉ रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, डॉ विष्णु कुमार तिवारी, डॉ शत्रुघ्न जेसवानी, डॉ बजरंगबली शर्मा, श्रीमती सुषमा पंड्या, शीतल प्रसाद पाटनवार, राम निहोरा राजपूत, महेंद्र दुबे, डॉ आशीष श्रीवास सहित अन्य साहित्यकारों ने भी अपनी काव्य प्रस्तुतियों एवं वक्तव्यों के माध्यम से पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम का समापन दो मिनट का मौन रखकर तथा डॉ. सुरेंद्र दुबे के बताए साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ किया गया।





