चूना पत्थर से बनी 25 फीट ऊंची प्रतिमा की होती है पूजा, रावणभाठा मैदान में 20 अक्टूबर मंगलवार को होगा 65 फीट के रावण का दहन
विशेष आलेख | सुमित दास महंत
रायपुर, रावणभाठा/ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रावणभाठा क्षेत्र में करीब 154 वर्ष पुरानी और लगभग 25 फीट ऊंची रावण की प्रतिमा स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी पहचान है। चूना पत्थर से बनी इस दस सिरों वाली प्रतिमा के पैरों में जंजीर है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसमें सीमेंट और लोहे के सरिए का इस्तेमाल नहीं किया गया। दशहरे पर इस प्रतिमा का दहन करने के बजाय पूजा की जाती है।
स्थानीय निवासी एवं कबीरपंथी सुमित दास महंत के अनुसार, उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस प्रतिमा को देखती आई हैं। हालांकि, इसके निर्माण का सटीक वर्ष और निर्माणकर्ता के बारे में प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सुबह पूजा, शाम को रावण दहन
रावणभाठा की परंपरा में रावण के विद्वत्ता, ज्ञान और पराक्रम जैसे गुणों से प्रेरणा लेने की मान्यता है। वहीं, उसके अहंकार और अनुचित कर्मों को बुराई का प्रतीक मानकर दशहरे पर पुतला दहन किया जाता है। यह परंपरा संदेश देती है कि अच्छे गुण अपनाएं और गलत आचरण से दूर रहें।
रावणभाठा मैदान में 20 अक्टूबर को विजयादशमी उत्सव
रायपुर के ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में विजयादशमी उत्सव 2026 के लिए 65 फीट ऊंचा रावण तथा 55-55 फीट ऊंचे मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार किए जाने की जानकारी है। आयोजन संबंधी विवरण के अनुसार, मुख्य रावण दहन कार्यक्रम 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को निर्धारित है।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि रावणभाठा क्षेत्र की पुरानी प्रतिमा और मैदान में दहन के लिए बनाया जाने वाला रावण का पुतला अलग-अलग हैं। एक स्थानीय आस्था और ऐतिहासिक स्मृति का प्रतीक है, जबकि दूसरा विजयादशमी के सार्वजनिक उत्सव का हिस्सा है।
संत कबीर की वाणी में आध्यात्मिक संदेश
कबीरपंथी सुमित दास महंत संत कबीर की वाणी को आत्मचिंतन और सत्य की खोज का माध्यम मानते हैं।
एक राम दशरथ का बेटा,
एक राम घट-घट में बैठा।
एक राम का सकल पसारा,
एक राम त्रिभुवन से न्यारा॥
कबीर की वाणी मनुष्य को विवेक, आत्मज्ञान और मानवता का सम्मान करने की प्रेरणा देती है। रावणभाठा की परंपरा के संदर्भ में भी यही संदेश महत्वपूर्ण है कि ज्ञान और शक्ति के साथ विनम्रता तथा सदाचार आवश्यक हैं।
सुमित दास महंत का संदेश है कि अपनी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करें, अच्छे गुण अपनाएं और अहंकार व अन्याय से दूर रहें। रावणभाठा की ऐतिहासिक प्रतिमा और विजयादशमी का उत्सव रायपुर की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।
सुमित दास महंत
कबीरपंथी एवं स्थानीय निवासी, रावणभाठा, रायपुर





