धमतरी 6 मई 2026 / रात गहराने लगी थी, लेकिन सांकरा चेक पोस्ट पर पुलिस की आंखों में नींद नहीं, सिर्फ शक दौड़ रहा था… तभी मैनपुर की तरफ से आती एक सफेद रेनॉल्ट डस्टर ने जैसे ही बैरिकेड के पास ब्रेक लिया, माहौल अचानक बदल गया। गाड़ी में बैठे तीन चेहरे बार-बार नजरें चुरा रहे थे और यही बेचैनी धमतरी पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बन गई। पुलिस ने दरवाजा खुलवाया, सवाल शुरू हुए, जवाब उलझने लगे और फिर डिक्की खुलते ही पूरा खेल सामने आ गया… अंदर ठूंसे गए थे 38 पैकेट, जिनमें भरा था करीब 55 किलो गांजा… कीमत इतनी कि कई जिंदगियां तबाह कर दे। देखते ही देखते सांकरा नाका किसी फिल्मी क्राइम सीन में बदल गया, जहां हर पैकेट तस्करी के बड़े नेटवर्क की कहानी चीख रहा था। धमतरी पुलिस पहले से अलर्ट मोड पर थी। एसपी के सख्त निर्देश के बाद सीमावर्ती इलाकों में ऐसी घेराबंदी की गई थी कि ओडिशा से निकलने वाली हर संदिग्ध गाड़ी रडार पर थी। जैसे ही डस्टर MH 45 AD 9001 रोकी गई, सिहावा पुलिस और नाके पर तैनात टीम ने गाड़ी की परत-दर-परत तलाशी शुरू की और कुछ ही मिनटों में तस्करों का पूरा आत्मविश्वास बिखर गया। पूछताछ में जो खुलासा हुआ उसने पुलिस की आशंका को सच साबित कर दिया। पकड़े गए आरोपी अमोल अरुण ओढेंकर पिता अरुण परशुराम ओढेंकर उम्र 33 वर्ष निवासी देवी मंदिर रोड शिंदे थाना नासिक रोड जिला नासिक महाराष्ट्र, तनिष गायकवाड पिता बाबा साहेब गायकवाड उम्र 19 वर्ष निवासी श्रीरामपुर थाना श्रीरामपुर जिला अहमदनगर महाराष्ट्र और ऋषिकेश पिता भाउ साहेब सिरसाट उम्र 23 वर्ष निवासी राहाता थाना राहाता जिला अहमदनगर महाराष्ट्र ने कबूल किया कि यह गांजा ओडिशा के बलांगीर से खरीदा गया था और महाराष्ट्र के नासिक तक पहुंचाया जाना था। लेकिन उससे पहले ही धमतरी पुलिस ने पूरे खेल का क्लाइमेक्स बदल दिया। पुलिस ने 54 किलो 970 ग्राम गांजा, पांच लाख की रेनॉल्ट डस्टर और चार मोबाइल फोन सहित कुल 33 लाख 53 हजार 500 रुपये का माल जब्त कर लिया। थाना सिहावा में अपराध क्रमांक 38/26 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) में मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार किया गया और अब सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है। सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि यही सांकरा नाका सिर्फ 15 दिन पहले भी गांजा तस्करों के लिए काल बन चुका था, जब 127 किलो गांजा पकड़कर करीब 72 लाख रुपये की बड़ी कार्रवाई की गई थी। लगातार दूसरी बड़ी पकड़ ने साफ कर दिया है कि धमतरी पुलिस अब सिर्फ चेकिंग नहीं कर रही, बल्कि सीमाओं पर फैल चुके नशे के नेटवर्क की नसें काट रही है। बहरहाल, सांकरा नाके पर हर गुजरती गाड़ी अब सिर्फ वाहन नहीं बल्कि शक की चलती हुई फाइल बन चुकी है और धमतरी पुलिस का संदेश बिल्कुल साफ है—नशे का रास्ता चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, उसका अंत आखिरकार जेल की सलाखों पर ही जाकर रुकता है।







