सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। कभी लोगों के लिए ‘संजीवनी’ मानी जाने वाली डायल 112 सेवा अब बिलासपुर में खुद जीवन के लिए जूझ रही है। जिले को मिली सभी 28 इमरजेंसी रिस्पॉन्स गाड़ियां तकनीकी रूप से कंडम घोषित हो चुकी हैं। पहले 10 गाड़ियां खराब होकर बंद हुईं, फिर जुगाड़ से चल रहीं 18 गाड़ियों ने भी जवाब दे दिया। अब एक पेट्रोलिंग गाड़ी के भरोसे जिले की इमरजेंसी, रिस्पॉन्स टाइम पर बड़ा सवाल। नतीजा .. अब एक भी डायल 112 वाहन सड़क पर नहीं है।
पेट्रोलिंग गाड़ी के भरोसे 112 की कॉल
112 पर आने वाली हर कॉल का बोझ अब थानों की पेट्रोलिंग टीम पर डाल दिया गया है। समस्या यह है कि हर थाने में आमतौर पर सिर्फ एक पेट्रोलिंग गाड़ी है। वही गाड़ी अपराधियों को पकड़ने, गश्त, कोर्ट ड्यूटी और अस्पताल ड्यूटी में लगी रहती है। ऐसे में मेडिकल, आगजनी या दुर्घटना की इमरजेंसी पर तुरंत पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है।
क्यों बढ़ गया रिस्पॉन्स टाइम?
एक गाड़ी, कई काम
पेट्रोलिंग वाहन पहले से व्यस्त रहता है, 112 कॉल पर तुरंत निकलना मुश्किल। • बड़ा क्षेत्र, ट्रैफिक जाम: सरकंडा, सिविल लाइन, कोटा, तखतपुर, सीपत, मस्तूरी और सिरगिट्टी जैसे बड़े थाना क्षेत्रों में एक छोर से दूसरे छोर पहुंचने में ही 30-40 मिनट लग जाते हैं।
निजी विकल्प भी बंद
पहले किराये के वाहनों से काम चलाया जाता था, अब वह व्यवस्था भी बंद है। ‘संजीवनी’ थी तो क्या था?डायल 112 की असली ताकत थी — दुर्घटना में घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाना, झगड़े की जगह पर मिनटों में पुलिस का पहुंचना, महिलाओं को समय पर मदद मिलना। ये सेवा गोल्डन ऑवर में जान बचाने के लिए बनाई गई थी। आज वही सेवा ‘बेबस’ है।
प्रशासन का पक्ष: जल्द आएंगी नई गाड़ियां
इस पर बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह का कहना है-
“कुछ वाहन पुराने होने के कारण अनुपयोगी हो गए हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से रिप्लेस करने की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल थानों की पेट्रोलिंग गाड़ियों से रिस्पॉन्स दिया जा रहा है, ताकि नागरिकों को मदद मिलती रहे। जल्द ही संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी और नई गाड़ियां भी मिलेंगी।”
सबसे बड़ा सवाल
जब पूरा सिस्टम ही पेट्रोलिंग गाड़ी के भरोसे है, तो बिलासपुर में इमरजेंसी का रिस्पॉन्स टाइम कैसे सुधरेगा? ‘संजीवनी’ को खुद ‘जीवन’ की तलाश है। जिले के लोगों को अब नई गाड़ियों का इंतजार है, क्योंकि हर सेकंड की देरी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।






