बिलासपुर 28 अप्रैल 2026/ ऐतिहासिक नगर मल्हार में ‘ज्ञान भारतम अभियान’ के तहत मिली बड़ी सफलता जब प्राचीनतम ताम्रपत्र प्राप्त किया गया; यह ताम्रपत्र जिसमें ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में उकेरा गया है इतिहास। छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी मल्हार एक बार फिर अपनी गर्भ में छिपे ऐतिहासिक रहस्यों के कारण चर्चा में है। ‘ज्ञान भारतम अभियान’ के तहत एक ऐसी खोज हुई है जिसने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों को उत्साहित कर दिया है। यहाँ के स्थानीय निवासी संजीव पाण्डेय के पास से करीब 2000 वर्ष पुराना एक अत्यंत दुर्लभ ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है।
खोज की मुख्य विशेषताएं
वजन और स्वरूप: इस ताम्रपत्र का वजन 3 किलोग्राम से अधिक है, जो इसकी भव्यता को दर्शाता है। लिपि और भाषा: इस पर प्राचीन भारत की आधारभूत ब्राह्मी लिपि और बौद्ध काल की मुख्य भाषा पाली में लेख उत्कीर्ण हैं।
ताम्रपत्र का ऐतिहासिक काल
जानकारों के अनुसार यह मौर्य काल या उसके ठीक बाद की अवधि का हो सकता है। क्यों खास है यह ताम्रपत्र: विशेषज्ञों के अनुसार, प्राचीन काल में इस तरह के ताम्रपत्रों का उपयोग भूमि दान, राजकीय आदेश या महत्वपूर्ण धार्मिक घोषणाओं को आधिकारिक रूप देने के लिए किया जाता था। इस ताम्रपत्र का वैज्ञानिक और ऐतिहासिक अध्ययन उस दौर की: सामाजिक संरचना,प्रशासनिक व्यवस्था, व धार्मिक परंपराओं पर से पर्दा हटा सकता है। “यह खोज न केवल मल्हार बल्कि पूरे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।”
– विशेषज्ञ दल*
क्या है ‘ज्ञान भारतम अभियान’?
यह खोज संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम अभियान’ का हिस्सा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों को उनकी पुरानी पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करना है। संरक्षण: पुरानी पांडुलिपियों की पहचान कर उनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है। जिसका लक्ष्य है भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा (साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा और दर्शन) को आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोना।
विरासत का संरक्षण
यह खोज सिद्ध करती है कि हमारी ऐतिहासिक और बौद्धिक संपदा आज भी जीवंत है। मल्हार में मिले इस ताम्रपत्र के माध्यम से शोधकर्ताओं को प्राचीन भारत की कार्यप्रणाली को गहराई से समझने का एक सुनहरा अवसर मिलेगा।




