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बाउंसरों की दबंगई पर पुलिस का तगड़ा एक्शन!

पत्रकारों से बदसलूकी करने वाले तीन बाउंसर गिरफ्तार, सरेआम निकाला गया जुलूस

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद हिली पुलिस, रायपुर की सड़कों पर दिखाई ताकत

रायपुर। राजधानी रायपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में रविवार रात पत्रकारों से की गई बदसलूकी के बाद बवाल मच गया। कवरेज करने पहुंचे मीडियाकर्मियों से न केवल हाथापाई की गई, बल्कि खुलेआम गाली-गलौज और धमकियां भी दी गईं। बाउंसरों की यह दबंगई पुलिस की मौजूदगी में हुई, जिससे पूरे पत्रकार समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया।

पिस्तौल लहराकर पहुंचा बाउंसर संचालक, पुलिस रही मौन

घटना उस समय और गंभीर हो गई जब बाउंसर एजेंसी का संचालक वसीम बाबू अपने तीन साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और पत्रकारों को पिस्तौल दिखाकर धमकाने लगा। महिला सुरक्षाकर्मियों को जबरन गेट से हटाकर मीडियाकर्मियों की ओर धकेला गया। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रदेशभर में हड़कंप मच गया।

तीन घंटे की चुप्पी के बाद पुलिस पर पड़ा दबाव, निकला विरोध जुलूस

मौके पर पहुंची पुलिस ने शुरुआत में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे नाराज पत्रकारों ने रायपुर प्रेस क्लब के नेतृत्व में मुख्यमंत्री निवास की ओर विरोध मार्च किया। भारी दबाव के बाद मौदहापारा थाना पुलिस ने वसीम बाबू सहित तीन बाउंसरों को गिरफ्तार कर लिया। वसीम के घर से एक पिस्तौल और जिंदा कारतूस भी बरामद हुए।

हथकड़ी पहनाकर निकाला जुलूस, शहर में मचा हड़कंप

सोमवार सुबह रायपुर की सड़कों पर पुलिस ने इन तीनों आरोपियों को हथकड़ी पहनाकर जुलूस की शक्ल में घुमाया। यह नज़ारा जिसने भी देखा, वही पुलिस की कार्रवाई को सराहता नजर आया। लोगों ने इसे “गुंडागर्दी के खिलाफ बड़ा संदेश” बताया। इस दौरान शहर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई।

धरना, निंदा और कार्रवाई का ऐलान

पत्रकारों ने मेकाहारा गेट पर धरना दिया, जिसमें पुलिस अधिकारियों के साथ कई वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने घटना की निंदा करते हुए बाउंसर एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई की बात कही।

स्वास्थ्य मंत्री का सख्त संदेश 

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पत्रकारों के साथ इस तरह की हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान करने वालों को मिट्टी में मिला दिया जाएगा।”

पत्रकार सुरक्षा पर फिर उठा सवाल

इस घटना ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मीडिया संगठनों ने मांग की है कि अस्पतालों व संवेदनशील क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेशभर के पत्रकार अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे।

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