Close Menu
The Bharat TimesThe Bharat Times
    What's Hot

    सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा खेल: फर्जी नियुक्ति पत्र में 5 विभागों की भर्ती दिखाकर युवाओं को ठगा, सचिवों के डिजिटल सिग्नेचर तक नकली

    April 24, 2026

    शीतल प्रसाद पाटनवार स्वच्छता योद्धा से सम्मानित ; दुलहरा सरोवर रतनपुर में चलाया सफाई अभियान

    April 24, 2026

    24 अप्रैल राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: ग्राम स्वराज, सहभागिता और लोकतंत्र की जड़ें

    April 24, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, April 24
    Facebook X (Twitter) Instagram
    The Bharat TimesThe Bharat Times
    Demo
    • होम
    • मेरा शहर
    • छत्तीसगढ़
      • सारंगढ़ बिलाईगढ़
      • बलौदाबाजार
      • कोरबा
      • बिलासपुर
      • अंबिकापुर
      • रायपुर
    • मध्य प्रदेश
      • डिंडोरी
        • समनापुर
        • करंजिया
        • अमरपुर
        • सहपुरा
          • बजाग
        • मेंहदवानी
    • देश दुनिया
    • मनोरंजन
    • राजनीति
    • होम
    • मेरा शहर
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
    • देश दुनिया
    • मनोरंजन
    • राजनीति
    The Bharat TimesThe Bharat Times
    छत्तीसगढ़ HD MAHANTBy HD MAHANTMarch 13, 2026

    13 मार्च विश्व नींद दिवस पर विशेष- चिंतनीय रपट :भारतीयों की हो रही नींदें कम

    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

    सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” आज के तेज़ रफ्तार जीवन में एक ऐसी समस्या चुपचाप हमारे समाज को जकड़ती जा रही है, जिस पर अभी पर्याप्त गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा,वह है भारतीयों की घटती नींद। भारत धीरे-धीरे नींद की कमी की गंभीर समस्या की ओर बढ़ता दिख रहा है। एक हालिया राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार देश के लगभग 46 प्रतिशत लोगों को रोजाना छह घंटे से भी कम निर्बाध नींद मिल पाती है, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक स्वस्थ रहने के लिए औसतन आठ घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। यह सर्वे दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच देश के 393 जिलों में किया गया, जिसमें 89 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे के अनुसार केवल 8 प्रतिशत लोगों को ही रोजाना 8′ से 10 घंटे की निर्बाध नींद मिल रही है, जबकि 42 प्रतिशत लोग 6 से 8 घंटे सो पाते हैं। वहीं 23 प्रतिशत लोग केवल 4 से 6 घंटे और इतने ही लोग चार घंटे या उससे कम नींद ले पाते हैं। सर्वे के आधार पर कहा जा सकता है कि लगभग 70 करोड़ भारतीय इस समस्या से ग्रसित हैं।
    यह केवल एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चिंता का विषय बनती जा रही है।नींद मनुष्य के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की मूलभूत आवश्यकता है। चिकित्सक सामान्यतः वयस्क व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद को आवश्यक मानते हैं। किंतु आधुनिक जीवनशैली ने इस प्राकृतिक नियम को लगभग उलट कर रख दिया है। देर रात तक मोबाइल फोन, टीवी और इंटरनेट का उपयोग, कार्यस्थल का बढ़ता दबाव, आर्थिक प्रतिस्पर्धा, शहरी जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव ये सभी कारण मिलकर मनुष्य की नींद को छीनते जा रहे हैं।आज महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। देर रात तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की आदत, मनोरंजन के अनंत डिजिटल साधन, ऑनलाइन कार्य संस्कृति तथा चौबीसों घंटे चलने वाली आर्थिक गतिविधियाँ लोगों की दिनचर्या को इस तरह बदल रही हैं कि नींद के लिए समय ही नहीं बच रहा।परिणामस्वरूप लोग रात को देर से सोते हैं और सुबह जल्दी उठने की मजबूरी के कारण उनकी नींद अधूरी रह जाती है।
    इस समस्या का प्रभाव केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि मन और समाज पर भी पड़ता है। कम नींद से स्मरण शक्ति कमजोर होती है, कार्यक्षमता घटती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। लंबे समय तक नींद की कमी से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, अवसाद और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इनसोम्निया जैसी समस्या आज तेजी से लोगों में दिखाई देने लगी है, जिसमें व्यक्ति को पर्याप्त नींद ही नहीं आती। यह स्थिति यदि लंबे समय तक बनी रहे तो व्यक्ति का मानसिक संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।
    बच्चों और युवाओं में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी,ऑनलाइन गेमिंग और देर रात तक मोबाइल के उपयोग ने नई पीढ़ी की नींद को बुरी तरह प्रभावित किया है। विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों में थकान, एकाग्रता की कमी और मानसिक तनाव के मामलों में वृद्धि इसका प्रमाण है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस विषय पर समाज और शासन दोनों ने ध्यान नहीं दिया तो यह भविष्य में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है। जिस राष्ट्र की युवा पीढ़ी स्वस्थ और ऊर्जावान होती है, वही राष्ट्र विकास की दिशा में आगे बढ़ता है। लेकिन यदि वही पीढ़ी नींद की कमी, तनाव और मानसिक थकान से ग्रस्त होगी तो उसकी रचनात्मक क्षमता प्रभावित होना स्वाभाविक है।इस स्थिति से निपटने के लिए सबसे पहले हमें अपनी जीवनशैली में संतुलन लाना होगा। नियमित समय पर सोने और जागने की आदत, रात में मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों का सीमित उपयोग, संतुलित आहार तथा नियमित व्यायाम जैसी आदतें अच्छी नींद पाने में सहायक हो सकती हैं। भारतीय परंपरा में योग और ध्यान को मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। नियमित योग करने से तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
    विश्व नींद दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त नींद कोई विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता है। यदि हम अपने स्वास्थ्य की रक्षा करना चाहते हैं और समाज को स्वस्थ बनाना चाहते हैं, तो हमें अपनी दिनचर्या में नींद को भी उतना ही महत्व देना होगा जितना भोजन और व्यायाम को देते हैं।
    कुल मिलाकर समाधान कठिन नहीं है, आवश्यकता केवल जागरूकता और अनुशासन की है। सबसे पहले हमें अपनी जीवनशैली में संतुलन लाना होगा। सोने और जागने का एक निश्चित समय निर्धारित करना, रात में मोबाइल और स्क्रीन का सीमित उपयोग करना, नियमित व्यायाम करना तथा मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान को अपनाना उपयोगी उपाय हो सकते हैं।योग और ध्यान जैसी भारतीय परंपराएँ न केवल शरीर को स्वस्थ रखती हैं, बल्कि मन को भी शांत और संतुलित बनाती हैं, जिससे अच्छी नींद प्राप्त करने में सहायता मिलती है।इसके साथ ही परिवार, समाज और कार्यस्थलों को भी ऐसी संस्कृति विकसित करनी चाहिए, जहाँ व्यक्ति को पर्याप्त विश्राम और संतुलित जीवन जीने का अवसर मिले। यदि हम विकास की दौड़ में स्वास्थ्य को ही खो देंगे, तो वह प्रगति अंततः खोखली सिद्ध होगी।
    अतः यह समय है कि हम इस चिंताजनक संकेत को गंभीरता से लें। पर्याप्त नींद कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी जीवनशैली में सुधार लाएँ और नींद को वह महत्व दें, जिसकी वह वास्तव में हकदार है।अंततः यह कहना उचित होगा कि एक स्वस्थ, ऊर्जावान और रचनात्मक समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है कि लोग पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लें।
    “अच्छी नींद ही अच्छे स्वास्थ्य और जीवन की आधारशिला है”।

    सुरेश सिंह बैस “शाश्वत बिलासपुर छत्तीसगढ़

    Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
    HD MAHANT
    • Facebook
    • Instagram

    Editor in chief

    Related Posts

    सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा खेल: फर्जी नियुक्ति पत्र में 5 विभागों की भर्ती दिखाकर युवाओं को ठगा, सचिवों के डिजिटल सिग्नेचर तक नकली

    April 24, 2026

    शीतल प्रसाद पाटनवार स्वच्छता योद्धा से सम्मानित ; दुलहरा सरोवर रतनपुर में चलाया सफाई अभियान

    April 24, 2026

    24 अप्रैल राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: ग्राम स्वराज, सहभागिता और लोकतंत्र की जड़ें

    April 24, 2026

    गौ सेवा एवं संरक्षण करना सभी का दायित्व है: डाॅ पाठक

    April 24, 2026

    अंग्रेजों के जमाने का कलेक्ट्रेट भवन का होगा संरक्षण: होगा कायाकल्प

    April 24, 2026

    नाबालिग को भगाकर किया दुष्कृत्य आरोपी पकड़ा गया

    April 24, 2026
    Editors Picks

    सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा खेल: फर्जी नियुक्ति पत्र में 5 विभागों की भर्ती दिखाकर युवाओं को ठगा, सचिवों के डिजिटल सिग्नेचर तक नकली

    April 24, 2026

    शीतल प्रसाद पाटनवार स्वच्छता योद्धा से सम्मानित ; दुलहरा सरोवर रतनपुर में चलाया सफाई अभियान

    April 24, 2026

    24 अप्रैल राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: ग्राम स्वराज, सहभागिता और लोकतंत्र की जड़ें

    April 24, 2026

    गौ सेवा एवं संरक्षण करना सभी का दायित्व है: डाॅ पाठक

    April 24, 2026
    About Us
    About Us

    एच. डी. महंत
    मुख्य संपादक

    📍 Official Address:
    Shop No. 2, Ground Floor, Gokul Apartment
    Near Shyam Nagar Chowk, Shyam Nagar, Telibandha
    Raipur, Chhattisgarh – 492013

    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Udyam Registration
    Udyam Registration

    UDYAM-CG-33-0000933

    post calendar
    April 2026
    M T W T F S S
     12345
    6789101112
    13141516171819
    20212223242526
    27282930  
    « Mar    
    © 2026 The Bharat Times. Designed by Nimble Technology.
    • About Us
    • Disclaimer
    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions
    • Refund Policy
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.