बिलासपुर 22 मार्च 2026/हाईकोर्ट ने माओवादी हमले में घायल एक जवान को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे जवान, जो पहले माओवादी हमले में गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, उन्हें माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात नहीं किया जा सकता।मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नागरदा गांव निवासी कांस्टेबल दिनेश ओगरे से जुड़ा है। वे छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की दूसरी बटालियन में कार्यरत हैं। साल 2016 में बीजापुर जिले के पामेड़ में ड्यूटी के दौरान माओवादी हमले में उनके सिर में गोली लगी थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में 2018 में उनके पैर में भी फ्रैक्चर हो गया, जिससे उन्हें चलने-फिरने और काम करने में दिक्कत होती है। इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय ने उनकी पोस्टिंग बीजापुर जिले के माओवाद प्रभावित अदवाड़ा कैंप में कर दी। इस फैसले के खिलाफ दिनेश ओगरे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि पुलिस महानिदेशक द्वारा पहले ही निर्देश जारी किए गए हैं कि माओवाद हमले में घायल जवानों को उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही ड्यूटी दी जाए और उन्हें माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में पोस्टिंग न दी जाए।दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि दिनेश ओगरे की मैदानी जिले में पोस्टिंग के लिए दिए गए आवेदन पर तुरंत निर्णय लिया जाए।
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