अनुपपुर 19 जुलाई 2026/ अमरकंटक में आयोजित पनिका समाज की राष्ट्रीय बैठक से अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जा बहाली की मांग को नया बल मिला। विभिन्न राज्यों से जुटे प्रतिनिधियों ने साझा रणनीति बनाते हुए चरणबद्ध आंदोलन और सरकारों पर दबाव बढ़ाने का ऐलान किया।
अमरकंटक के कपिलधारा मार्ग स्थित धारकुंडी आश्रम सभागार में रविवार को पनिका समाज की अखिल भारतीय राष्ट्रीय बैठक आयोजित हुई। समाजसेवी बिहारीदास मुरचुले के नेतृत्व में हुई इस बैठक में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पनिका समाज को पुनः अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक स्तर पर संयुक्त रणनीति तैयार करना रहा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1971 से पहले अविभाजित मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में पनिका, पनका, पंख और पान जातियां अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल थीं। उनका कहना था कि 8 दिसंबर 1971 को संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 में संशोधन के बाद क्षेत्रीय प्रतिबंध लागू होने से एक ही समुदाय के लोगों को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग वर्गों में बांट दिया गया। समाज ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 16 में निहित समानता के अधिकार की भावना के विपरीत बताया। इसी दौरान पनिका अभियान महासमिति के प्रदेश अध्यक्ष सुमितदास महंत ने कहा कि एक ही प्रदेश में पनिका समाज के लोगों को आठ जिलों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) और शेष जिलों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा, “सड़क के एक तरफ रहने वाले पनिका आदिवासी हैं, जबकि उसी सड़क के दूसरी तरफ रहने वाले उसी समाज के लोग ओबीसी माने जाते हैं। यह व्यवस्था न्यायसंगत नहीं है। जब तक पनिका समाज को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक हमारा लोकतांत्रिक संघर्ष लगातार जारी रहेगा।”
प्रतिनिधियों ने बताया कि इस मांग के समर्थन में वर्ष 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती के कार्यकाल में मध्यप्रदेश सरकार तथा वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार केंद्र को अनुशंसा भेज चुकी है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह के समक्ष भी यह मांग रखी जा चुकी है। समाज ने वर्ष 1971 से पूर्व की स्थिति बहाल कर पूरे देश में पनिका, पनका, पंख और पान जातियों को पुनः एसटी सूची में शामिल करने की मांग दोहराई।
समाजसेवी बिहारीदास मुरचुले ने कहा कि आने वाले समय में चरणबद्ध आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और केंद्र व राज्य सरकारों को ज्ञापन सौंपकर इस मांग को और तेज किया जाएगा। बैठक में मुख्य अतिथि सत्य कबड्डी साहेब, प्रांतीय अध्यक्ष गणेशदास सोनवानी, देवधर महंत, सुखमनदास, पूरनदास सोनवानी, प्रदीप महंत, कमलेश मानिकपुरी, विशालदास महंत, श्यामदास टांडिया, पी.डी. बैरागी, हेमलाल पनिका, विष्णु कुमार पनिका, भूरेदास खैरवार, सुखीदास, फूलदास सोनवानी, दिलीप बघेल, सुरेश बघेल, पनिका अभियान महासमिति के प्रदेश अध्यक्ष सुमित दास महंत तथा पनिका समाज के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी एच.डी. महंत सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
फिलहाल, अमरकंटक की इस राष्ट्रीय बैठक ने पनिका समाज की लंबे समय से लंबित मांग को फिर राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने का संदेश दिया है। समाज का कहना है कि संवैधानिक अधिकारों की बहाली तक उनका लोकतांत्रिक आंदोलन और संघर्ष लगातार जारी रहेगा।





