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पश्चिम में चुनाव का अजब रणक्षेत्र:गुजरात में भाजपा अपनों में फंसी, कांग्रेस को अपने ही नहीं मिल रहे

लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच गुजरात में चौंकाने वाले सियासी घटनाक्रम चल रहे हैं। एक तरफ भाजपा कार्यकर्ता खुलकर अपने ही प्रत्याशी का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता खामोश बैठे हैं। इस आग में भाजपा के ऐसे कद्दावर घी डाल रहे हैं जो हाशिए पर धकेल दिए गए हैं।

कांग्रेस अलग संकट से जूझ रही है। पार्टी को कई जगह चुनाव लड़ने के लिए नेता नहीं मिल रहे हैं।गुजरात में 7 मई को वोटिंग है यानी 1 महीने बचे हैं और कांग्रेस 26 में 7 प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है।

भरत सोलंकी, जगदीश ठाकोर जैसे कई दिग्गज कांग्रेसी चुनाव लड़ने से मना कर चुके हैं। रोहन गुप्ता ने तो टिकट मिलने के बाद पार्टी छोड़ दी। ऐसे में चुनाव रोचक होता जा रहा है।

कार्यकर्ता रूठे तो उम्मीदवार बदले
2014 और 2019 में गुजरात की 26 सीटों पर क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा को इस बार अपनों के विरोध के चलते दो उम्मीदवार बदलने पड़े हैं। इनमें एक सीट वडोदरा है, जहां 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीते थे। यहां 2019 में भाजपा की प्रत्याशी रंजन भट्‌ट 5 लाख वोट से जीती थीं। इस बार कार्यकर्ताओं के विद्रोह के कारण भट्‌ट को टिकट लौटाना पड़ा।

वहीं, साबरकांठा सीट से भाजपा ने पहले भीखाजी ठाकोर को टिकट दिया, लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी ऐसे फूटी कि उनको टिकट लौटाना पड़ा। इसके बाद भाजपा ने पूर्व कांग्रेस विधायक महेंद्र सिंह बरैया की पत्नी शोभना बरैया को उम्मीदवार बनाया, लेकिन कार्यकर्ता इन पर भी अब तक सहमत नहीं हैं।

राजपूतों पर विवादित बोल से घिरे रुपाला, माफी भी बेअसर रही
राजकोट से भाजपा प्रत्याशी व केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला राजपूत समाज पर विवादित टिप्पणी कर घिर गए हैं। नाराज राजपूत समाज ने उनका टिकट काटने की चेतावनी दी। इसके बाद रुपाला ने 3 बार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटील ने 1 बार हाथ जोड़कर माफी मांगी, लेकिन समाज मान नहीं रहा।

राजपूतों के गुस्से की आंच राजस्थान और यूपी तक पहुंच गई है। अभी भाजपा टिकट न काटने का दावा कर रही है। हालांकि नुकसान बढ़ने पर रुपाला खुद नाम वापस ले लें, तो आश्चर्य नहीं होगा।

अनुशासित भाजपा में कलह की वजह क्या?

  • कांग्रेसमय भाजपा: 4 साल में विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सहित 60 हजार कांग्रेसी भाजपा में आए। उन्हें तवज्जो से भाजपा के कार्यकर्ता नाराज हैं।
  • 5 लाख से जीत: प्रदेशाध्यक्ष सीआर पाटिल ने हर सीट 5 लाख से जीतने का लक्ष्य दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि टिकट अपने हिसाब से दे रहे हैं, लक्ष्य का दबाव हम पर। कई ऐसे नेता भी मैदान में, जिनकी जमीनी पकड़ नहीं।

इन चार सीटों पर भी खुद से ही लड़ रही है भाजपा

सुरेंद्रनगर: मौजूदा सांसद महेंद्र मुंजपरा की जगह चंदू शिहोरा को टिकट। पांच लाख आबादी वाला तलपदा कोली समाज विरोध में है।

जूनागढ़: राजेश चुडास्मा प्रत्याशी। कोली समाज के एक डॉक्टर के सुसाइड नोट में इनका नाम था।

पोरबंदर: केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया प्रत्याशी हैं। कार्यकर्ता बाहरी बताकर घर बैठ गए हैं।

अमरेली: भरत सुतारिया के टिकट के विरोध में दो गुटों में मारामारी।

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