सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर । शहर के कई इलाकों में भीषण गर्मी के बीच जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। औद्योगिक परिक्षेत्र सिरगिटटी, हेमू नगर के कई इलाके,जैकब चाल, गणेश नगर, नयापारा और शिव टॉकीज चौक जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति ठप होने से हाहाकार मचा हुआ है।
लंबी कतारें: महिलाएं और बच्चे भीषण गर्मी में घंटों लाइनों में लगकर पानी भरने को मजबूर हैं। कई इलाकों में तो सुबह होने से पहले ही कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं।
आर्थिक बोझ: सरकारी सप्लाई न होने के कारण लोग निजी टैंकरों से पानी खरीदने को विवश हैं, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अमृत मिशन पर सवाल: शहर में ‘अमृत मिशन योजना’ के तहत करीब ₹300 करोड़ की लागत से घर-घर शुद्ध पेयजल और सीवरेज प्रबंधन का कार्य चल रहा है। इसके बावजूद, तकनीकी खामियों और अधूरे पाइपलाइन कार्यों के कारण जनता प्यासी है।
70 फीट नीचे गिरा भूजल स्तर
भीषण गर्मी के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है। जिले में भूजल स्तर लगभग 60 से 70 फीट तक नीचे चला गया है। इसका सीधा असर बिलासपुर शहर सहित तखतपुर, बिल्हा और मस्तूरी जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ा है, जहाँ जल संकट गहरा गया है।
खूंटाघाट डैम से छोड़ा गया पानी
बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने 25 अप्रैल 2026 को खूंटाघाट डैम से पानी छोड़ने का निर्णय लिया है। इस पहल से 107 गाँवों के लगभग 211 तालाबों को भरने की उम्मीद है।
राहत: इससे निस्तारी (दैनिक कार्यों) के लिए पानी की समस्या में कुछ सुधार होने की संभावना है, हालांकि पीने के साफ पानी की समस्या अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। अगर जल्द ही जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।





