सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 27 अप्रैल 2026/ शहर के विभिन्न इलाकों में आवारा व हिंसक कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब दिन के समय भी लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। पिछले कुछ दिनों में कुत्तों के हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आमजन में भय और आक्रोश दोनों बढ़ रहा है।
लगातार बढ़ रहे हमले
जानकारी के अनुसार, शहर में रोजाना 20 से 30 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल और सिम्स में आने वाले मरीजों के आंकड़े इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। कई मामलों में कुत्तों का व्यवहार असामान्य और हिंसक पाया गया है, जिससे ‘रेबीज’ का खतरा भी बढ़ गया है।
अस्पतालों में बढ़ रहा दबाव
सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन 40 से 50 तक मरीज कुत्तों के काटने के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि निजी अस्पतालों में आने वाले मामलों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। अनुमान है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। एंटी-रेबीज वैक्सीन की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
इन क्षेत्रों में ज्यादा खतरा
शहर के स्मार्ट रोड, व्यापार विहार, श्रीकांत वर्मा मार्ग, लिंक रोड, सीएमडी चौक, पीजीबीटी कॉलेज रोड, सिटी कोतवाली क्षेत्र, नेहरू नगर, जगमल चौक से पावर हाउस चौक, मंगला और रेलवे स्टेशन के आसपास कुत्तों के हमलों के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।
कुत्तों द्वारा रात में झुंड बनाकर हमला
रात होते ही स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क किनारे रहने वाले कुत्ते झुंड बनाकर राहगीरों पर हमला कर देते हैं। कई बार बाइक सवारों को दौड़ाने और गिराने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे गंभीर चोटें आ रही हैं।
नगर निगम की लापरवाही पर सवाल
नगर निगम द्वारा न तो कुत्तों की प्रभावी नसबंदी हो पा रही है और न ही उनका नियमित टीकाकरण। यही कारण है कि कुत्तों की संख्या और उनकी आक्रामकता दोनों बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
जनता में आक्रोश
लगातार बढ़ती घटनाओं से नागरिकों में रोष व्याप्त है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द विशेष अभियान चलाकर कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए, ताकि शहर में सुरक्षा का माहौल बन सके।
समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान, नियमित एंटी-रेबीज टीकाकरण, कचरा प्रबंधन में सुधार और जनजागरूकता अभियान अत्यंत आवश्यक हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। शहरवासियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।




