सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर शहर के पुराने मधुबन रोड पर स्थित कंवर राम श्मशानघाट आज अपनी दुर्दशा की कहानी स्वयं बयान कर रहा है। यह वह स्थान है, जहां जीवन का अंतिम सत्य साकार होता है, लेकिन विडंबना देखिए कि स्वयं यह स्थल ही उपेक्षा और अव्यवस्था की चपेट में है।

जर्जर होती व्यवस्था, बढ़ती परेशानियां
श्मशानघाट में स्थापित आधुनिक शवदाह गृह, जो कभी सुविधा और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से लगाया गया था, अब जंग और अनदेखी का शिकार हो चुका है। आसपास के मोहल्लों के लोग आज भी यदा-कदा अंतिम संस्कार के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। चारों ओर फैली गंदगी, कचरे के ढेर और दुर्गंध न केवल वातावरण को असहनीय बनाते हैं, बल्कि यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
अव्यवस्था का खुला मैदान
श्मशान परिसर में आवारा गाय, भैंस और बकरियां खुलेआम घूमती नजर आती हैं। ये न केवल गंदगी फैलाती हैं, बल्कि अंतिम संस्कार के लिए आए लोगों की सामग्री को भी नुकसान पहुंचाती हैं। चारों तरफ की चार दिवारी नहीं होने से ही यह स्थिति है।यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि यह स्थान गरिमा और शांति का प्रतीक होना चाहिए, न कि अव्यवस्था का केंद्र।

पर्यावरणीय पहल भी विफल
श्मशानघाट परिसर में यदि वृक्षारोपण का प्रयास भी किया जाता है, तो वह भी असफल हो जाता है। कारण ,इन पौधों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं, जिससे जानवर उन्हें नष्ट कर देते हैं। परिणामस्वरूप हरियाली की कल्पना केवल कागजों तक सीमित रह जाती है।
तुलना में उजागर होती सच्चाई
शहर के ही सरकंडा क्षेत्र में स्थित एक अन्य श्मशानघाट अपेक्षाकृत व्यवस्थित और साफ-सुथरा है। वहां की व्यवस्था यह साबित करती है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव है। फिर कंवर राम श्मशानघाट के साथ यह भेदभाव क्यों?

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
नगर निगम प्रशासन इस गंभीर स्थिति से अनभिज्ञ नहीं हो सकता, फिर भी सुधार के ठोस प्रयास नजर नहीं आते। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के प्रति उदासीनता का परिचायक है।
जन अपेक्षाएं और समाधान
स्थानीय लोगों की स्पष्ट मांग है कि: श्मशानघाट की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
आवारा पशुओं पर नियंत्रण किया जाए।
0 परिसर में हरियाली और वृक्षारोपण को संरक्षित किया जाए।
0 आधुनिक शवदाह गृह को मरम्मत कर पुनः चालू किया जाए।
0 बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी, प्रकाश और बैठने की व्यवस्था सुधारी जाए।
श्मशानघाट केवल एक स्थान नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और सभ्यता का दर्पण होता है। कंवर राम श्मशानघाट की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि हम विकास के दावों के बीच मानवीय मूल्यों को कहीं पीछे छोड़ते जा रहे हैं। अब समय है कि प्रशासन जागे और इस स्थल को उसकी गरिमा के अनुरूप स्वरूप प्रदान करे,क्योंकि अंततः यही वह स्थान है, जहां हर व्यक्ति को एक दिन पहुंचना है।




